14 जून 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Alwar News: जून में शुरू होगा 100 बेड का वार्ड, मरीजों की राह फिर भी नहीं होगी आसान

अलवर के सामान्य अस्पताल के पीछे छह मंजिला 100 बेड वार्ड का काम लगभग पूरा हो चुका है। भवन के निचले 2 फ्लोर पर मेडिसिन और मनोरोग विभाग की ओपीडी संचालित होगी, जहां चिकित्सकों के लिए 12-12 चैंबर बनाए गए हैं। यह जून से शुरू हो सकता है।

3 min read
Google source verification

अलवर

image

Santosh Trivedi

image

भुवनेश वशिष्ठ

May 16, 2026

new 100 bed ward in alwar Hospital

100 बेड का निर्माणाधीन वार्ड।

अलवर। सामान्य अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार का सपना धरातल पर आकार लेने लगा है। अस्पताल परिसर में करीब 132 करोड़ रुपए की लागत से बन रहे नए भवन का काम अंतिम चरण में है। जून में 100 बेड का अत्याधुनिक वार्ड शुरू होने की उम्मीद है, जिससे मरीजों को बड़ी राहत मिलने का दावा किया जा रहा है। हालांकि दूसरी तरफ बिना प्लानिंग हो रहे निर्माण कार्यों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

सबसे बड़ा मुद्दा नए भवनों की पुरानी ओपीडी, ट्रॉमा सेंटर और जांच इकाइयों से सीधी कनेक्टिविटी नहीं होने का है। ऐसे में मरीजों को जांच और उपचार के लिए अस्पताल परिसर में बार-बार लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। पार्किंग का संकट और ज्यादा गहराने की आशंका भी है।

अस्पताल के पीछे छह मंजिला 100 बेड वार्ड का काम लगभग पूरा हो चुका है। भवन के निचले दो फ्लोर पर मेडिसिन और मनोरोग विभाग की ओपीडी संचालित होगी, जहां चिकित्सकों के लिए 12-12 चैंबर बनाए गए हैं। इसके ऊपर की चार मंजिलों पर 25-25 बेड के वार्ड तैयार किए गए हैं।

मरीजों की आवाजाही को लेकर सवाल

स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ सबसे बड़ा सवाल मरीजों की आवाजाही को लेकर खड़ा हो रहा है। नए वार्ड से पुरानी ओपीडी, एमआरआइ, सीटी स्कैन और ट्रॉमा सेंटर तक पहुंचने के लिए सीधा और सुगम मार्ग विकसित नहीं किया गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि भर्ती मरीजों को जांच के लिए बार-बार पूरे अस्पताल परिसर में घूमना पड़ेगा। गंभीर मरीजों और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति परेशानी भरी साबित हो सकती है।

पार्किंग का संकट और गहराने की आशंका

जिला अस्पताल पहले से ही पार्किंग अव्यवस्था से जूझ रहा है। इसके बावजूद नए भवनों में पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था पर गंभीरता से काम नहीं किया गया। निर्माणाधीन 100 बेड वार्ड में स्टिल्ट पार्किंग की व्यवस्था जरूर प्रस्तावित है, लेकिन वहां महज 16 कारों के खड़े होने की ही क्षमता होगी। जानकारों का मानना है कि यदि दो लेयर बेसमेंट पार्किंग बनाई जाती तो भविष्य की जरूरतों को देखते हुए यह बेहतर विकल्प साबित हो सकता था।

दिसंबर तक रेजिडेंट हॉस्टल शुरू करने की तैयारी

100 बेड वार्ड के पास ही पांच मंजिला रेजिडेंट हॉस्टल का निर्माण भी जारी है। इस हॉस्टल में 62 रेजिडेंट चिकित्सकों के ठहरने की व्यवस्था होगी। प्रत्येक कमरे में एक चिकित्सक रहेगा, जबकि प्रथम मंजिल पर मैस, वेटिंग एरिया और अन्य सुविधाएं विकसित की जाएंगी। निर्माण एजेंसी एचएससीसी को यह भवन दिसंबर तक तैयार करने की समयसीमा दी गई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार वर्तमान में जिला अस्पताल में 72 रेजिडेंट सीट स्वीकृत हैं और भविष्य में इनकी संख्या बढ़ने की संभावना है।

क्रिटिकल केयर यूनिट की धीमी रफ्तार

अस्पताल परिसर में बन रहा पांच मंजिला क्रिटिकल केयर यूनिट भी फिलहाल धीमी रफ्तार से निर्माणाधीन है। अभी केवल भवन का ढांचा ही तैयार हो सका है। हालांकि विभाग का दावा है कि इसका निर्माण भी दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। इस यूनिट की पहली और दूसरी मंजिल पर मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर बनाए जाएंगे, जबकि ऊपरी मंजिलों पर 100 बेड के तीन वार्ड संचालित होंगे। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर मरीजों की त्वरित आवाजाही के लिए यहां दो अलग-अलग एंट्री और एग्जिट मार्ग जरूरी हैं।

कंपनी बाग रोड बन सकता है राहत का रास्ता

अस्पताल में नए वार्ड, हॉस्टल और क्रिटिकल केयर यूनिट निश्चित रूप से चिकित्सा सुविधाओं को नया विस्तार देंगे, लेकिन यदि आधारभूत जरूरतों-जैसे पार्किंग, सुगम पहुंच और आपातकालीन मार्ग पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, तो करोड़ों की ये परियोजनाएं मरीजों के लिए राहत से ज्यादा नई परेशानी का कारण बन सकती हैं। क्रिटिकल केयर यूनिट के पीछे कंपनी बाग रोड की ओर एक वैकल्पिक रास्ता विकसित किया जाए तो मरीजों और एम्बुलेंस की आवाजाही काफी आसान हो सकती है। इसके अलावा यदि जिला प्रशासन कंपनी बाग में पूर्व प्रस्तावित पार्किंग योजना को अमल में लाता है, तो अस्पताल परिसर में वर्षों से बनी पार्किंग समस्या से भी काफी राहत मिल सकती है।