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राजस्थान के किसानों व व्यापारियों का रास आ रहा हरियाणा, इस तरह कमा रहे मोटा मुनाफा

इन दिनों राजस्थान के किसानों को हरियााणा की मंडी रास आ रही है। राजस्थान सीमा से हरियाणा मे रोजाना सैकड़ों मण अनाज बिकने के लिए जा रहा है।
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Apr 13, 2018
FARMERS SELLING THEIR GRAIN IN HARYANA

नौगांवा. इन दिनों राज्य सरकार की ओर से समर्थन मूल्य पर की जा रही किसानों की फसलों की खरीद में ज्यादा औपचारिकता के कारण किसानों को समीपवर्ती राज्य हरियाणा की सरकारी खरीद ज्यादा रास आ रही है और रोजाना सैकड़ों मन राजस्थान का गेहूं हरियाणा में बिकने के लिए जा रहा है।

हरियाणा में फसल का हाथों-हाथ भुगतान

दोनों राज्यों की सरकारी खरीद में प्रथम खामी तो ये है कि हरियाणा में किसान एवं व्यापारी की ओर से फसल बेचने पर उसे अपनी फसल का भुगतान फसल बेचने के तुरन्त बाद मिल जाता है।

वहीं दूसरी ओर राजस्थान में सरकारी खरीद केंद्रों पर फसल बेचने पर किसान को राशि का नगद भुगतान नहीं कर या तो चेक से दिया जाता और या फिर बाद में उसके खाते में ट्रांसफर किया जाता है, जिसके कारण उसे बैंको में चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ता है और भुगतान का इंतजार कई दिनों तक करना पड़ता है। ऐसे में हरियाणा सीमा के आस-पास के राजस्थान के कस्बे एवं गांवों के लोग अपनी फसल को स्थानीय व्यापारियों अथवा हरियाणा के सरकारी खरीद केन्द्रों पर बेचना अधिक पसन्द करते हंै।

स्थानीय व्यापारी कमा रहे मोटा मुनाफा

सरकारी खरीद में आने वाली समस्याओं के कारण स्थानीय व्यापारी किसानों की मजबूरी का भरपूर फायदा उठा मोटा मुनाफा कमा रहे है । एक व्यापारी ने बताया कि वे किसान से 1625 से 1650 रुपए प्रति क्विंटल में गेहूं की खरीद कर हरियाणा के सरकारी केन्द्रों पर 1690 से 1700 रुपए में गेहूं को बेच रहे हैं। दूसरे राज्य में गेहूं भेजने में परेशानी न आए इसके लिए वो माल को ट्रक अथवा पिकअप में भेजने के बजाय ट्रैक्टरों में भेज रहे है। क्षेत्र के नौगांवा, मुबारिकपुर, पाटा, रामगढ़, गोविन्दगढ़, लक्ष्मणगढ़ के इलाकों से रोजाना इस तरह गेहूं बेचने का खेल चल रहा है।

दोनों राज्यों में खरीद प्रक्रिया में अंतर

दोनों राज्यों में एक ही पार्टी की सरकारें हैं, परन्तु सरकारी खरीद में काफी अंतर है । एक ओर जहनं राजस्थान में गेहूं खरीद के लिए खरीद केन्द्र स्थापित किए जाते हैं और सरकार के अधीन आने वाले विभाग इसकी खरीद करते हैं, वहीं हरियाणा में मण्डी में लाइसेंसशुदा व्यापारियों को इसकी जिम्मेदारी दी गई है, जो किसानों की फसलों को समर्थन मूल्य पर खरीदते हैं और बाद में सरकार की ओर से उस फसल का भुगतान 2.5 प्रतिशत कमीशन के साथ किया जाता है।

Updated on:
13 Apr 2018 10:59 am
Published on:
13 Apr 2018 10:58 am