देशव्यापी 'गो सम्मान आह्वान अभियान' के तहत सोमवार को अलवर शहर में गो-भक्तों और विभिन्न सामाजिक-धार्मिक संगठनों ने एकजुट होकर 'गो सम्मान दिवस' मनाया।
देशव्यापी 'गो सम्मान आह्वान अभियान' के तहत सोमवार को अलवर शहर में गो-भक्तों और विभिन्न सामाजिक-धार्मिक संगठनों ने एकजुट होकर 'गो सम्मान दिवस' मनाया। इस अवसर पर शहर में एक भव्य रैली का आयोजन किया गया, जिसमें शामिल गो-सेवकों ने गाय के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट की और सरकार से गौवंश के संरक्षण व सम्मान के लिए कड़े कदम उठाने की पुरजोर मांग की।
सोमवार सुबह अलवर के भवानी तोप चौराहा पर बड़ी संख्या में गो-सेवक और आमजन एकत्रित हुए। कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत रूप से गोमाता के पूजन के साथ की गई। जिला प्रभारी गो-सेवक अजय अग्रवाल के नेतृत्व में निकली यह यात्रा मुख्य मार्गों से होकर गुजरी। यात्रा का आकर्षण गो-सेवकों का अनूठा प्रदर्शन रहा, जिसमें सभी लोग हाथों में घंटे-घड़ियाल लिए हुए थे। गूँजते हुए घंटे और घड़ियालों की ध्वनि के बीच 'जय गौमाता' के जयघोष से पूरा शहर गुंजायमान हो उठा।
विभिन्न मार्गों से होती हुई यह रैली मिनी सचिवालय (कलेक्ट्रेट) पहुंची। यहाँ गो-सेवकों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राजस्थान के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से सरकार से गौवंश के सम्मान के लिए प्रमुख मांगें रखी गईं।
प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना था कि गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और आस्था का केंद्र है। इसलिए केंद्र सरकार को गौमाता को 'राष्ट्रमाता' का दर्जा प्रदान करना चाहिए। इसके अलावा, गो-सेवकों ने ज्ञापन में सड़कों पर बेसहारा घूम रहे गौवंश के पुनर्वास, गो-आश्रय स्थलों की बेहतर व्यवस्था और गौ-तस्करी पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने जैसी प्रमुख मांगें प्रमुखता से उठाईं।
गो-सेवकों ने कहा कि आज का दिन गौवंश के प्रति समाज को जगाने और सरकार को उनकी पीड़ा से अवगत कराने का है। उन्होंने कहा कि अलवर सहित पूरे देश में गौवंश की दुर्दशा चिंताजनक है, जिसे सुधारने के लिए नीतिगत निर्णय की आवश्यकता है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में शहरवासी, गौशाला संचालक और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे। रैली में शामिल लोगों ने संकल्प लिया कि वे निरंतर गौ-सेवा के कार्य जारी रखेंगे और सरकार पर तब तक दबाव बनाएंगे जब तक कि गौवंश को समाज और कानून में उचित सम्मान नहीं मिल जाता।