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अलवर की जीवनदायिनी रूपारेल नदी का ड्रोन सर्वे पूरा, 7 विभागों की बैठक में DPR पर मंथन आज; जल्द हटेंगे अतिक्रमण

Ruparel River: अलवर जिले की जीवनदायिनी मानी जाने वाली रूपारेल नदी के पुनर्जीवन की दिशा में सिंचाई विभाग ने कदम तेज कर दिए हैं।

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अलवर

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Anil Prajapat

Apr 27, 2026

Ruparel River

रूपारेल नदी। पत्रिका फाइल फोटो

Alwar News: अलवर जिले की जीवनदायिनी मानी जाने वाली रूपारेल नदी के पुनर्जीवन की दिशा में सिंचाई विभाग ने कदम तेज कर दिए हैं। नदी का ड्रोन सर्वे पूरा हो चुका है और सर्वे एजेंसी द्वारा तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) सोमवार शाम 4 बजे मिनी सचिवालय में होने वाली सात विभागों की बैठक में रखी जाएगी।

बैठक में सिंचाई, कृषि, उद्यान, वन, पंचायतीराज, वाटरशेड, भूजल विभाग समेत अलवर जिला प्रशासन के अधिकारी डीपीआर पर चर्चा करेंगे। इस सर्वे पर करीब 1.45 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं और इसे पूरा होने में लगभग छह महीने लगे। बैठक में शामिल सभी विभाग अपने-अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज करेंगे।

10 दिन में तैयार होगी फाइनल डीपीआर

इसके बाद करीब 10 दिनों के भीतर संशोधित कर फाइनल डीपीआर तैयार की जाएगी। फाइनल रिपोर्ट को अनुमोदन के लिए राज्य सरकार को भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद ही परियोजना के लिए बजट आवंटन और आगे की कार्यवाही शुरू होगी।

115 किलोमीटर बहाव क्षेत्र पर फोकस

अलवर से सीकरी तक करीब 115 किलोमीटर लंबे बहाव क्षेत्र में बहने वाली रूपारेल नदी को पुनर्जीवित करने के लिए यह डीपीआर तैयार की गई है। सर्वे रिपोर्ट सिंचाई विभाग को सौंप दी गई है, जिसके आधार पर अब बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू होगी।

सामने आई मुख्य समस्याएं

सर्वे में सामने आया कि नदी का पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पा रहा है। इसके प्रमुख कारणों में जगह-जगह बने छोटे-बड़े बांध, बहाव क्षेत्र का संकुचन और अवैध अतिक्रमण शामिल हैं। इसके अलावा कई स्थानों पर अवैध बजरी खनन से गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिनमें पानी रुक जाता है और आगे का प्रवाह प्रभावित होता है।

अतिक्रमण हटाने के लिए बनेगी टीम

डीपीआर के आधार पर सिंचाई विभाग अतिक्रमण की जांच के लिए विशेष टीम गठित करेगा। यह टीम चिन्हित स्थलों का भौतिक सत्यापन कर संबंधित लोगों को नोटिस जारी करेगी। इसके बाद जिला प्रशासन के सहयोग से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि यदि नदी के मूल स्वरूप को बहाल कर दिया गया तो बरसात में पानी का प्रवाह सुचारू होगा और क्षेत्र में भूजल स्तर में भी सुधार देखने को मिलेगा।