अलवर

दरक रहे सरकारी भवन, बरसात में टपक रही छतें, दीवारों में दरारें

शिक्षा के कई जर्जर भवनों में पढ़ाई कर रहे नौनिहाल, प्रशासन की हिदायत, सावधानी बरतें

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Jul 31, 2025

अलवर. देश को आजादी मिलने से पहले के या तब से लेकर अब तक संचालित शिक्षा के मंदिर जिम्मेदारों की अनदेखी से तीनों जिलों अलवर, खैरथल-तिजारा व बहरोड़-कोटपूतली में दम तोड़ रहे हैं। हालात ये है कि कई भवन गिरने के कगार पर खड़े हैं। इसके बावजूद इन्हीं भवनों में नौनिहालों को पढ़ाना मजबूरी बना हुआ है। इनकी सुध लेने की याद किसी को नहीं आई। हाल ही में एक के बाद एक झालावाड़ और जैसलमेर जिले में हुए स्कूल गिरने के हादसों ने सरकार से लेकर प्रशासन, अभिभावकों सहित सभी की आंखें खोल दी। उक्त दो हादसों में जिन नौनिहालों की जान गई, जिनके घरों का चिराग बुझा, वे पूरे सिस्टम को कोस रहे हैं। अब सरकार व प्रशासन ने भले ही सरकारी भवनों के हालातों की सर्वे टीमों से रिपोर्ट मांगी है, लेकिन इनके जीर्णोद्धार की स्पष्ट लक्ष्मण रेखा तो अब भी नहीं खींची गई। जिले में ऐसे कई स्कूल व कॉलेज भवन जर्जर हैं, जो कभी बारिश या तेज तूफान में जमींदोज हो सकते हैं। हालात बया करती पढ़ें यह रिपोर्ट।

45 वर्ष पुराना हो चुका भवन:
लक्ष्मणगढ़. कस्बे में पुरानी सब्जी मंडी के समीप संचालित महात्मा गांधी रावि भवन 45 वर्ष पुराना होने से खण्डर हो गया है। कार्यवाहक प्रधानाध्यापक दीप ङ्क्षसह ने बताया कि कक्षा 1 से 7वीं तक 92 विद्यार्थी और शिक्षक भय के साए में रहते हैं। भवन की दीवारों से चूना गिरता है, छत टपक रही है और गेट भी टूटे हुए हैं। भवन कभी भी ढह सकता है। सुरक्षा भी नहीं है। कई बार पत्र लिखकर वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की गई। गत दिनों ने एसडीएम महोकमङ्क्षसह ने विद्यालय के निरीक्षण के दौरान वैकल्पिक स्थान तलाशने के निर्देश दिए थे।
30 वर्ष से बंद था: यह भवन 10 वर्ष से बंद था। महात्मा गांधी रावि की घोषणा हुई तो इसी में संचालन शुरू कर दिया। पूर्व में यहां राउप्रावि संचालित था, लेकिन उसे राउमावि में विलय कर दिया। तब से ताला लटका हुआ था।

540 विद्यार्थियों पर मंडरा रहा खतरा
रामगढ़. पुराने व जर्जर भवन में संचालित राजकीय महाविद्यालय रामगढ़ भवन की छत बारिश में टपकती है। कमरों की दीवारों में दरारें होने से पानी रिसता है। सीलन से करंट का डर रहता है। करीब 5 वर्ष से संचालित इस भवन में छह कमरे हैं जो सभी क्षतिग्रस्त हो चुके। शुरुआती सत्र में महाविद्यालय का संचालन बहादरपुर रोड पुराने सरकारी स्कूल में किया था। सफाई और शौचालय के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। सुरक्षा भी शून्य है। कॉलेज स्टाफ की परेशानी और छात्रों की मांग को राजस्थान पत्रिका के अलवर संस्करण में पहले भी उठाया था। इसके बाद कैंपस में सफाई व्यवस्था में सुधार तो हुआ, लेकिन सुरक्षा की ²ष्टि से कोई सुधार नहीं हुआ। यह ढिलाई 540 से अधिक विद्यार्थियों को भारी न पड़ जाए। अब यह डर सताने लगा है। कॉलेज प्रशासन ने पीडब्ल्यूडी को भवन मरम्मत के लिए पत्र भी लिखा है। गोङ्क्षवदगढ़ रोड पर सरकार की ओर से आवंटित करीब दो हैक्टेयर भूमि पर 5 करोड़ 51 लाख 29 हजार रुपए की लागत से नया भवन तैयार होना था, लेकिन उस भूमि पर विवाद के चलते कार्य लंबित है। कुल 600 सीटों का यह महाविद्यालय हैं। कॉलेज में बालिकाओं की संख्या ज्यादा हैं।

Published on:
31 Jul 2025 11:55 pm
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