रोटी, कपड़ा और मकान...! जीवन में हर व्यक्ति को इन तीनों की महत्ती आवश्यकता है। चाहे बालक हो या बुजुर्ग या फिर जवां। इन तीनों की आवश्यकता पूर्ति के लिए हर हाथ को रोजगार मिलना जरूरी है। बढ़ती बेरोजगारी के बीच गांवों से शहरों में पलायन कर रहे ग्रामीण अंचल के जरूरतमंद लोगों के लिए तो 100 दिन का रोजगार के लिए मनरेगा योजना संचालित हैं, लेकिन शहरी क्षेत्र के जरूरतमंदों को ऐसी सुविधा नहीं थी। राज्य सरकार के ध्यान में यह विषमता आई तो मनरेगा की तर्ज पर इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना शुरू कर दी, जो
अलवर. रोटी, कपड़ा और मकान...! जीवन में हर व्यक्ति को इन तीनों की महत्ती आवश्यकता है। चाहे बालक हो या बुजुर्ग या फिर जवां। इन तीनों की आवश्यकता पूर्ति के लिए हर हाथ को रोजगार मिलना जरूरी है। बढ़ती बेरोजगारी के बीच गांवों से शहरों में पलायन कर रहे ग्रामीण अंचल के जरूरतमंद लोगों के लिए तो 100 दिन का रोजगार के लिए मनरेगा योजना संचालित हैं, लेकिन शहरी क्षेत्र के जरूरतमंदों को ऐसी सुविधा नहीं थी। राज्य सरकार के ध्यान में यह विषमता आई तो मनरेगा की तर्ज पर इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना शुरू कर दी, जो शहरों में जरूरतमंदों का अब संबल बन रही है।
कुछ दशकों से रोजगार को लेकर सरकारी योजनाओं में अधिकतर फोकस गांवों तक सीमित, लेकिन अब शहरी क्षेत्र में भी कई जरूरतमंद परिवारों को आर्थिक संबल मिलने लगा है। राज्य सरकार की ओर से शहरी क्षेत्रों में शुरू की गई इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना अलवर जिले में कई परिवारों के लिए वरदान बन रही है। इस योजना से कई परिवारों को आर्थिक मदद मिल रही है। मौजूदा समय में भी योजना में अलवर जिले के गोविंदगढ़ नगरपालिका क्षेत्र में 100 से अधिक परिवारों को योजना में काम मिलने से उनका रोजगार का सपना पूरा हो रहा है। शहरी रोजगार योजना से शहर से जुड़ी व्यवस्थाएं भी सुधर रही हैं।
उल्लेखनीय है कि ग्रामीण क्षेत्र में केंद्र सरकार की ओर से संचालित महात्मा गांधी नरेगा योजना की तर्ज पर गत वर्ष राज्य सरकार ने भी शहरी क्षेत्र के लोगों को रोजगार मुहैया कराने के लिए इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना शुरू की थी। योजना में शहरी क्षेत्र में रहने वाले परिवारों को 100 दिन रोजगार की सौगात दी जानी है। इन दिनों गोविंदगढ़ नगरपालिका क्षेत्र में योजना से जुड़े कई कार्यों में 200 से अधिक परिवारों के लोग काम कर रहे हैं। ग्राम पंचायत को नगरपालिका का दर्जा मिलने के साथ ही मनरेगा योजना बंद हो गई थी। जिसके बाद कस्बे में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले लोग रोजगार की तलाश में खाली घूम रहे थे। योजना शुरू हुई तो एक हजार के करीब आवेदन प्राप्त हुए। नगरपालिका अधिशासी अधिकारी विनोद मीणा, अध्यक्ष उर्मिला अजय मेठी के अथक प्रयासों के चलते यह योजना नगरपालिका में शुरू पाई। राज्य सरकार की स्वीकृति के बाद यहां नगरपालिका क्षेत्र में नवंबर से शुरू हुई शहरी रोजगार योजना में 985 बेरोजगार लोगों ने रोजगार की उम्मीद में आवेदन किया। इससे कस्बे में ठाले घूम रहे बेरोजगार लोगों को रोजगार के साथ आर्थिक मदद मिल रही है।
पालिका में भी हो रहा विकास
योजना शुरू होने से पहले पालिका को शहरी क्षेत्र से जुड़े छोटे-मोटे कार्यों को करवाने में काफी परेशानी होती थी। अब योजना के तहत मुक्तिधाम, कब्रिस्तान, पार्क की साफ-सफाई, रोड किनारे झाडिय़ों की कटाई, गोशाला में गोवंश की देखरेख व साफ-सफाई, अवैध होर्डिंग्स हटवाने, सरकारी भवनों की चारदीवारों की रंगाई-पुताई जैसे कार्य आसानी से हो सकेंगे। योजना के तहत शहरी क्षेत्र में स्थित सरकारी भवनों में फैली गंदगी को हटाने के साथ ही रंगाई-पुताई के अभाव में दुर्दशा का शिकार हो रही भवनों की चारदीवारी को भी दोबारा रंगाई-पुताई करवाकर चमकाया जा रहा है। जिससे दीवारों की सुंदरता भी बढ़ रही है। योजना में किले में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के अन्तर्गत एक छोटे तालाब की खुदाई कार्य भी कराया जा सकता है, जिसमें बारिश का पानी एकत्रित हो सके। तहसीलदार विनोद कुमार मीणा के अनुसार मनरेगा योजना में करीब डेढ़ सौ से अधिक लोगों को रोजगार दिया गया है। प्रतिदिन लोग मनरेगा में रोजगार के लिए आवेदन कर रहे थे। वहीं नगरपालिका गोविंदगढ़ चेयरमैन उर्मिला मेठी का कहना है कि मजदूर वर्ग को रोजगार की आवश्यकता को देखते हुए तीन जगह शहरी रोजगार गारंटी योजना के तहत कार्य प्रारंभ किया गया है। योजना में कार्यों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग भी की जा रही है।