मेडिकल कॉलेज में तैयारी पर लाखों रुपया खर्च किया लेकिन, अब चीन में रह रहे भारतीयों को भेजने की अनुमति नहीं मिली
अलवर.
चीन में कोरोना वायरस फैलने से वहां रहे रहे लोगों की चिंता कम नहीं हो सकी है लेकिन, अब चीन से भारतीयों को अलवर में लाने की गुंजाइश खत्म होने लगी है। चीन में आमजन को एक शहर से दूसरे शहर में भी नहीं जाने दिया जा रहा है। जिसके कारण यह माना जा रहा है कि वहां रह रहे भारतीयों को लाना मुश्किल हो गया है। अलवर के इएसआइसी मेडिकल कॉलेज में भारतीयों को कुछ दिन चिकित्सा देखरेख में रखने के लिए बनाए गए आइसोलेशन वार्ड पर लाखों रुपया खर्च किया लेकिन, अब लग नहीं रहा कि यहां बनाया गया वार्ड काम आ सकेगा। यहां लगाए गए नर्सिंग स्टाफ को पहले ही वापस अस्पतालों में भेजा जा चुका है। अब केवल नोडल अधिकारी रहे हैं। उनके पास भी दिल्ली से ऐसी कोई सूचना नहीं है कि चीन से भारतीयों को अलवर लाया जाएगा या नहीं।
करीब 6 लाख रुपए खर्च -
एमआइए में करीब 850 करोड़ रुपए का इएसआइसी मेडिकल कॉलेज भवन बनाया हुआ है। जहां मेडिकल कॉलेज की बजाय अभी केवल 50 बैड का इएसआइसी अस्पताल चालू हैं। इसी परिसर में केन्द्र सरकार ने चीन में रह रहे भारतीयों को रखने के लिए आइसोलेनशन वार्ड बनाया गया। जिसके बैड सहित अन्य तैयारियों पर करीब छह लाख रुपए भी खर्च किए गए। जयपुर, झुंझुनूं, उदयपुर व भीलवाड़ा से 30 नर्सिंगकर्मियों का स्टाफ भी लगाया गया था। करीब 11 दिन बाद नर्सिंग स्टाफ को वापस भेज दिया गया है। अब नोडल अधिकारी को भी वापस भेजने की तैयारी है।
चीन में रह रहे भारतीयों के परिजन चिंतित -
चीन में वायरस अभी काबू में नहीं आ सका है। जिसके कारण वहां रह रहे भारतीयों के परिजन अधिक चिंतिंत हैं। परिजन सरकार से चीन में रह रहे भारतीयों को अपने देश में लाने की मांग भी कर रहे हैं लेकिन, अभी ऐसा नहीं हो सका है। वैसे कुछ भारतीय पहले आ चुके हैं। जिनको दूसरी जगहों पर कुछ दिन चिकित्सा देखरेख में रखने के बाद वापस भेजा गया है।
14 दिन हो जाएंगे पूरे -
चिकित्सा अधिकारियों का कहना है कि चीन से आए करीब 600 भारतीयों को छाबला व माणेसर में रखा गया है। उनकी चिकित्सा देखरेख का 14 दिन का समय शुक्रवार को पूरा हो जाएगा। वहां भी अभी किसी संदिग्ध को वायरस की पुष्टि नहीं हुई है।