पिछले वर्ष की तुलना मे मिल रहा कम भाव
बहरोड़. बाजार में सरसों के भावों में उछाल नहीं आने के कारण कृषि उपज मंडी समिति की आय में भी जहाँ कमी देखने को मिल रही है तो किसानों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। सरसों की आवक कम होने के कारण मंडी टैक्स में गत वर्ष की तुलना में लाखों रुपए की कमी आई है।
मिल रहा कम भाव: मंडी टैक्स में कमी आने का सबसे बड़ा कारण एक यह भी है कि पिछले वर्ष किसानों को बढिय़ा भाव मिल रहा था लेकिन इस वर्ष इसमें दो से ढाई हजार रुपए की कमी देखने को मिल रही है।क्योंकि फसल कटाई के दौरान हुई बरसात ने सरसों की फसल खराब कर दी थी। जिससे सरसों की क्वॉलिटी पर असर पड़ा और किसानों को सरसों के बेहतर भाव नहीं मिल पाए। ऐसे में किसानों ने भी बढिय़ा भाव मिलने की उम्मीद में फसल को रोक लिया। दूसरी ओर राज्य सरकार समर्थन मूल्य पर वर्तमान बाजार भाव से पांच सौ से एक हजार रुपए अधिक भाव में सरसों की खरीद कर रही है। जिसके कारण भी किसान खुले बाजार में सरसों बेचने की बजाय सरकारी तुलाई केंद्र पर सरसों बेचना ज्यादा पसंद कर रहे है। बहरोड़ कृषि उपज मंडी में सरसों की आवक मार्च माह में शुरू हो जाती है। गत वर्ष रोजाना तीन से चार हजार कट्टे आवक रोजाना हो रही थी तो वह घटकर इस वर्ष आधी से भी कम रह गई है।
फैक्ट फाइल वर्ष 2022
अप्रैल- 12 लाख 35 हजार
मई - 22 लाख 33 हजार
जून - 27 लाख 20 हजार
फैक्ट फाइल वर्ष 2023
मार्च- 8 लाख 29 हजार
अप्रैल -9 लाख 4 हजार
मई- 29 लाख 18 हजार रुपए
पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कृषि उपज मंडी में सरसों की आवक महज आधी ही रह गई है। जिसका असर मंडी टैक्स पर भी देखने को मिल रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष अभी तक आधा टैक्स भी तीन माह में नहीं आया है।
राकेश यादव, प्रभारी कृषि उपज मंडी बहरोड़