Rajasthan Election 2018: गुजरात चुनाव के ‘मणि बम’ के बाद अब यहां CP Joshi का ‘जाति-बम’ भी फोड़ डाला...
अलवर। चुनावी रण में न्यायपालिका भी मुददा बनती नजर आ रही है। राजस्थान का सिंहद्वार कहे जाने वाले अलवर में रविवार को चुनावी सभा में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने कांग्रेस पर न्यायपालिका को इंपीचमेंट (महाभियोग) से डराने का गंभीर आरोप लगाया है। विजय नगर मैदान में पहली चुनावी सभा को संबोधित करते हुए मोदी कांग्रेस पर काफी आक्रमक नजर आए। rajasthan election 2018 अपने 48 मिनट के भाषण में मोदी ने न्यायपालिका और अयोध्या के मुददे को जोडकऱ कांग्रेस को सीधे कठघरे में ला खड़ा किया। साथ ही गुजरात चुनाव के ‘मणि बम’ के बाद अब यहां CP Joshi का ‘जाति-बम’ भी फोड़ डाला। मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधा कि विकास पर बात करने की हिम्मत ही नहीं, इसलिए चुनाव में मोदी की जाति को मुद्दा बनाया जाता है।
PM Modi ने कहा कि कांग्रेस देश में खतरनाक खेल खेल रही है। संसद में रोड़े अटकाती है। संसद में वे कोई काम नहीं होने देते। बुद्धिजीवियों को इसकी विवेचना करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को वे राज्यसभा में लेकर आते हैं। राज्यसभा में हमारा बहुमत नहीं है। ये वकील राज्यसभा में आकर जो काम सुप्रीम कोर्ट में कानून के तहत नहीं करा पाते वह कराना चाहते हैं। जब सुप्रीम कोर्ट का कोई जज अयोध्या जैसे गंभीर संवेदनशील मसलों में देश को न्याय दिलाने की दिशा में सबको सुनना चाहते हैं तो कांग्रेस के राज्यसभा के वकील सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्तियों के खिलाफ महाभियोग लाकर उनको डराते धमकाते हैं। कांग्रेस न्याय प्रक्रिया में दखल देती है।
जब अयोध्या केस चल रहा था, कांग्रेस के नेता और राज्यसभा सांसद ने कहा कि 2019 तक केस मत सुनो, क्योंकि 2019 में चुनाव है। न्यायतंत्र को राजनीति में घसीटना सही है क्या? क्या न्यायपालिका पर दबाव डालना चाहिए? मैं गंभीर आरोप लगाना चाहता हूं कि उन्होंने नया दावं चला है।
यदि सुप्रीम कोर्ट का जज उनके अनुसार टाइम टेबल नहीं बनाता है तो वह रोड़े अटकाने के लिए ये राज्यसभा में बैठे वकील जजों के खिलाफ इंपीचमेंट (महाभियोग) लाकर उन्हें धमकाना चाहते हैं। यह खतरनाक खेल है। कांग्रेस पार्टी संवेदनशील मामलों पर सुनवाई से रोकने का पाप कर रही है। ऐसी कांग्रेस पार्टी जिसका न्याय में भरोसा नहीं, न्यायपालिका में भरोसा नहीं, न्यायमूर्ति में भरोसा नहीं। राज्यसभा में अपनी ताकत के बल पर न्याय प्रक्रिया को ढेर कर देश को बंदी बनाने का काम कर रही है। इनको कभी माफ नहीं किया जा सकता। मैं देश के न्यायपालिकाओं और न्यायमूर्तियों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि देश की जनता ने जब-जब हमें देश की सेवा करने का मौका दिया हम कांग्रेस के काले कारनामों को लोकतंत्र के मंदिर में पूरा नहीं होने देंगे। न्याय पालिका की स्वतंत्रता के लिए काम करेंगे। मैं न्यायमूर्तियों से कहना चाहूंगा कि इंमपीचमेंट की धमकियों से डरो मत, आप हिम्मत के साथ न्याय की राह पर चलो, देश आपके साथ चलेगा। मैं आपको यह विश्वास दिलाना चाहता हूं।
क्या है इम्पीचमेंट (महाभियोग) प्रक्रिया
हाईकोर्ट या सुप्रीमकोर्ट के किसी जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के लिए राज्यसभा के कम से कम 50 और लोकसभा के कम से कम 100 सांसदों का समर्थन जरूरी है। राज्यसभा सभापति को यदि लगता है कि प्रस्ताव लाने जैसा है तो वे समिति बनाते हैं, जो आगे विचार करती है। अन्यथा वे इसे खारिज भी कर सकते हैं। कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के एक जज, किसी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और एक वरिष्ठ कानूनविद शामिल होते हैं। कमेटी यदि आरोपों को सही पाती है तो जिस सदन में प्रस्ताव लाया गया है, वहीं रिपोर्ट पर चर्चा होती है। चर्चा के बाद वोटिंग होती है। इस दौरान जज को सदन में मौजूद रहना होता है, या वकील के जरिए पक्ष रखना होता है। प्रस्ताव पारित होने के लिए सदन के कम से कम दो -तिहाई सदस्यों के वोटों की जरूरत होती है। दोनों सदनों में प्रस्ताव पारित होने पर उसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है। अगर वे जज को हटाने का फैसला लेते हैं तो उन्हें एक आदेश जारी करना पड़ा है।
देश के तीन दलित अत्याचारों का जिक्र
प्रधानमंत्री ने देश के तीन दलित अत्याचारों का जिक्र करते हुए कांग्रेस को दलित विरोधी बताया। उन्होंने कहा कि हरियाणा का 2010 का मिर्चपुर कांड, 2005 का सोनीपत का गोहाना कांड और 2011 में कर्नाटक में हुई दलितों की हत्याएं कांग्रेस की दलित विरोधी मानसिकता की गवाह हैं।