
रक्षाबंधन के त्योहार पर अलवर में पतंगबाजी का अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। त्योहार से पहले ही शहर के मालाखेड़ा बाजार में पतंगों की दुकानें सज गई हैं। सुबह से शाम तक दुकानों पर बच्चों, युवाओं और परिवारों की भीड़ दिखाई दे रही है। दुकानदारों को इस बार अच्छी बिक्री की उम्मीद है। बाजार में स्थानीय कारीगरों की तैयार पतंगों के साथ जयपुर, रामपुर, अहमदाबाद और आगरा से आई अलग-अलग डिजाइन और आकार की पतंगें भी उपलब्ध हैं।
मालाखेड़ा बाजार में पतंगों की दो दर्जन से ज्यादा दुकानें हैं। जयपुर से पतंग बेचने आए वसीम खान ने बताया कि वे पिछले 25 वर्षों से पतंग कारोबार के लिए अलवर आते रहे हैं। उनके मुताबिक इस बार कपड़े से बनी पतंगों के साथ पीवीसी पतंगों की भी मांग देखने को मिल रही है। मालाखेड़ा से जिले के लक्ष्मणगढ़, रामगढ़ और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पतंगों की थोक आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा हरियाणा के फिरोजपुर झिरका सहित आसपास के क्षेत्रों में भी यहां से पतंगें भेजी जा रही हैं।
अलवर में इस बार बाजार में पन्नी की पतंगों की मांग ज्यादा दिखाई दे रही है। झालर वाली और पीवीसी से बनी पतंगें छोटे से लेकर बड़े आकार में उपलब्ध हैं। बरेली का मांझा भी पतंगबाजों की पसंद बना हुआ है। वहीं आगरा का सफेद सद्दा भी बाजार में खरीदारों को मिल रहा है।
बड़े आकार की पतंगें बच्चों और युवाओं को खास तौर पर आकर्षित कर रही हैं। रात में पतंग उड़ाने के शौकीनों के लिए लाइट वाली पतंगें भी बाजार में लाई गई हैं। एक दुकानदार के अनुसार बाजार में दो रुपए से लेकर 200 रुपए तक की पतंगें उपलब्ध हैं। घर और मंदिरों की सजावट के लिए छोटी पतंगों के साथ चरखियां भी बिक रही हैं। बच्चों के लिए कार्टून पात्रों वाली रंग-बिरंगी पतंगें भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
पतंगबाजी के साथ लोग सुरक्षित डोर के इस्तेमाल पर भी जोर दे रहे हैं। दुकानदारों और पतंगबाजों का कहना है कि चाइनीज मांझे से होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए इससे दूरी रखना जरूरी है। लोग देसी सूती मांझे को प्राथमिकता देने की बात कह रहे हैं।
खरीदारों को भी ऐसी डोर इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है, जिससे राहगीरों, वाहन चालकों और पक्षियों को नुकसान न हो। त्योहार के उत्साह के बीच सुरक्षा का ध्यान रखने की अपील भी की जा रही है।