अलवर

Alwar: सरिस्का छोड़ने को तैयार 200 परिवार, पर प्रशासन को नहीं मिल रही जमीन

सरिस्का में बाघ बढ़ रहे हैं। उनकी संख्या के अनुसार इलाका कम पड़ रहा है, लेकिन सरिस्का प्रशासन यहां बसी आबादी को दूसरी जगह शिफ्ट नहीं कर पा रहा है। जमीन नहीं मिलने की वजह से ऐसा हो रहा है। उधर, ग्रामीण बाघों की चहलकदमी से डर के साये में जीने को मजबूर हैं।
2 min read
• •
Updated: 18 Jun 2026, 5:03 PM IST
sariska village
सरिस्का अभयारण्य में स्थित एक गांव

सरिस्का टाइगर रिजर्व से गांवों के विस्थापन पर सुप्रीम कोर्ट ने जोर दिया है, लेकिन इसकी प्रक्रिया फिर धीमी हो गई हैं। यही कारण है कि देवरी व हरिपुरा के ग्रामीणों को जमीन नहीं मिल पा रही है। इन गांवों के करीब 200 परिवार जंगल से बाहर जाने को तैयार हैं। अब सरकार जैसे ही जमीन का मुद्दा हल करेगी, तो यह गांव जंगल से बाहर हो जाएंगे।


देवरी गांव के विस्थापन के लिए लक्ष्मणगढ़ में करीब 6 माह पहले जमीन देखी गई, लेकिन जांच की गई तो यह वन विभाग की निकली। यह जमीन ग्रामीणों को बिना डायवर्जन के नहीं दी जा सकती। इसका प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था, लेकिन मंजूरी नहीं मिल पाई। करीब 125 परिवार जंगल से बाहर नहीं जा पा रहे हैं। इसी तरह हरिपुरा गांव के लोग दूसरी जगह बसने के लिए तैयार हो गए हैं। काफी मशक्कत के बाद इन्हें राजी किया गया, लेकिन इनको भी थानागाजी में जगह नहीं मिल रही है। हालांकि तिजारा में जमीन है, लेकिन यह वहां नहीं जाना चाहते। थानागाजी में जमीन के लिए पत्र लिखे गए, पर यह मामला भी अब ठंडे बस्ते में चला गया।

डेरा गांव के लोग तिजारा जाएंगे

डेरा गांव के लोग भी जंगल से बाहर जाने को राजी हो गए हैं। ये तिजारा जाने को तैयार हैं। इसकी प्रक्रिया सरिस्का प्रशासन ने आगे बढ़ा दी है। सरिस्का में 29 गांव हैं, जिसमें भगानी, रोट क्याला, उमरी, बाबली, पानी ढाल के ग्रामीणों को पूरी तरह विस्थापित कर दिया गया, जिससे 200 हेक्टेयर एरिया खाली हो गया। उसके बाद 11 गांवों को विस्थापित करने की प्रक्रिया चल रही है, जिसमें क्रास्का, हरिपुरा, सुकोला, देवरी, कांकवाड़ी, नाथूसर गांव शामिल हैं। इन गांवों की आधे परिवार दूसरी जगह शिफ्ट कर दिए गए हैं। कई परिवारों को जमीन का इंतजार है।

बाघों को कम पड़ रहा है जंगल

सरिस्का में लगातार बाघों की संख्या में इजाफा हो रहा है। इस वजह से टेरेटरी के लिए जमीन कम पड़ रही है। इसके चलते कई बाघ आबादी इलाकों में विचरण कर रहे हैं। इन इलाकों में उन्हें आसानी से भोजन मिल जाता है। बाघों के विचरण की वजह से इन स्थानों पर रहने वाले लोग दहशत में हैं। अगर इन लोगों को अन्य स्थानों पर जमीन मिल जाए तो बाघों को अपनी जमीन मिल सकेगी।

Updated on:
18 Jun 2026, 5:03 PM IST
Published on: