उज्जैन

सुरक्षा के इंतजाम नहीं, इसलिए नशाखोरों के लिए यह स्थान बना सुरक्षित

राजीव गांधी सामान्य अस्पताल नशे का गढ़ बन रहा है। अस्पताल में चारों तरफ नशे में काम आने वाली दवाओं के रैपर व खाली बोतल पड़ी रहती हैं। जिससे पता चलता है कि अस्पताल में लोग नशे में कितनी दवाओं का काम लेते हैं।
less than 1 minute read
• •
Updated: 11 Sep 2016, 6:53 PM IST
Feature image

राजीव गांधी सामान्य अस्पताल नशे का गढ़ बन रहा है। अस्पताल में चारों तरफ नशे में काम आने वाली दवाओं के रैपर व खाली बोतल पड़ी रहती हैं। जिससे पता चलता है कि अस्पताल में लोग नशे में कितनी दवाओं का काम लेते हैं।

मानसिक रोग में काम आने वाली दवाओं को भी लोग नशे में काम लेते हैं। बीते कुछ समय से इन दवाओं की डिमाण्ड में बढ़ोतरी हुई है। सामान्य अस्पताल के आउट डोर में प्रतिदिन हजारों मरीज इलाज के लिए आते हैं। अस्पताल के वार्ड में भी बड़ी संख्या में मरीज भर्ती रहते हैं।

अस्पताल में सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं। एेसे में लोग अस्पताल में आकर नशा करते हैं। अस्पताल के शौचालय, आउट डोर भवन व वार्डों में के बाहर, अस्पताल की छत पर जाने वाली रास्ते व छत पर नशे में काम आने वाली सीरप की खाली बोतल पड़ी हुई हैं। प्रतिदिन अस्पताल में इसी तरह के हालात रहते हैं। इस पर किसी का ध्यान नहीं है।

दूसरी तरफ मानसिक रोगियों की संख्या में तेजी से बढ़ रही है। इसके पीछे एक कारण मानसिक दवाओं का नशे में काम आना है। नशे के आदी लोग इन दवाओं को काम में ले रहे हैं। मानसिक रोग की ओपीडी में 200 तक मरीज आ रहे हैं। जबकि आम तौर पर इनकी संख्या 100 के आसपास रहती है।

Published on: