261 कैदी रखा रहे हैं उपवास, रमजान में 260 ने रखा था रोजा अलवर. अलवर सेंट्रल जेल में इन दिनों माता के जयकारे गूंज रहे हैं। यहां पर करीब 261 कैदी है जो कि इन दिनों नवरात्र में उपवास कर रहे हैं, प्रतिदिन ये बंदी माता की आरती सामूहिक रूप से गाते हैं और पूजा […]
261 कैदी रखा रहे हैं उपवास, रमजान में 260 ने रखा था रोजा
अलवर. अलवर सेंट्रल जेल में इन दिनों माता के जयकारे गूंज रहे हैं। यहां पर करीब 261 कैदी है जो कि इन दिनों नवरात्र में उपवास कर रहे हैं, प्रतिदिन ये बंदी माता की आरती सामूहिक रूप से गाते हैं और पूजा भी करते हैं। भक्ति , साधना और आत्मचिंतन के जरिए बंदियों व कैदियों में आ रहे इस बदलाव को जेल प्रशासन भी महसूस कर रहा है।
शाम को फलाहार के लिए ठेकेदार के जरिए फल उपलब्ध कराए जाते हैं, नवरात्र की समाप्ति पर जेल में हवन भी किया जाता हैं, जिसमें नवरात्र करने वाले कैदी शामिल होते हैं। गौरतलब है कि जेल में मंदिर भी बना हुआ है जिसमें नियमित पूजा अर्चना होती है, यहां कैदी नवरात्र के दौरान दुर्गा चालिसा, दुर्गा गायत्री सहित अन्य मंत्र आदि का जाप भी करते हैं। वर्तमान में यहां करीब 11 सौ से ज्यादा कैदी है।
रमजान में रखा था रोजा
रमजान माह के दौरान मुस्लिम समाज के करीब 260 कैदियों ने रोजा रखा। इन कैदियों को भी ठेकेदार के जरिए प्रतिदिन रोजा इफ्तार के लिए फल का इंतजाम करवाया जाता है। रमजान या सामान्य दिनों के दौरान ही कैदी प्रतिदिन नमाज भी अता करते हैं।
कैदियों के जीवन में आ रहा है बदलाव
जेल में आने वाले हिंदू कैदी जो कि नवरात्र रखते हैं उनकी संख्या करीब 261 है, इनको फलाहार के लिए चाय व फल का इंतजाम ठेकेदार के जरिए किया जाता है, इसमें केले व अन्य फल दिए जाते हैं। जेल सुरक्षा नियमों के तहत यह व्यवस्था की गई है। कैदियों को सीधे ही सामान दिए जाने पर रोक है। गायत्री परिवार की ओर से यहां पर हवन किया जाता है और समय समय पर अन्य आध्यात्मिक गतिविधियां करवाई जाती है। इससे कैदियों के जीवन में बदलाव भी नजर आने लगा है।
शिवेंद्र शर्मा,जेल अधीक्षक, सेंट्रल जेल, अलवर।