11 मई 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सरकारी स्कूलों में छुट्टियों का बड़ा ‘खेल’: मनचाहा तबादला भी लिया और नियम विरुद्ध डकार गए 10 पीएल, सरकार को लाखों का चूना

राजस्थान के अलवर जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर 'प्रिविलेज लीव' (PL) हथियाने का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। मनचाही जगह तबादला कराने के बावजूद सैकड़ों शिक्षकों ने मिलीभगत कर अपनी सर्विस बुक में अतिरिक्त छुट्टियां जुड़वा लीं, जिससे सरकारी खजाने को भारी चपत लग रही है।

2 min read
Google source verification
alwar news

​जिला ​शिक्षा अ​धिकारी माध्यमिक का  कार्यालय 

अलवर जिले के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को मिलने वाली पीएल (प्रिविलेज लीव) को लेकर बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। नियमों के अनुसार 10 पीएल का लाभ केवल उन शिक्षकों को दिया जाता है, जिनका पदस्थापन सरकार की ओर से दूरस्थ स्थानों पर किया जाता है, लेकिन अलवर सहित कई जिलों में मनचाहे स्थान पर तबादला करवाने वाले शिक्षक भी इस सुविधा का लाभ लेते पाए गए हैं।

बताया जा रहा है कि कई स्कूलों में संस्था प्रधानों की मिलीभगत से शिक्षकों की सर्विस बुक में नियम विरुद्ध 10 पीएल जोड़ दी गई हैं। जिले में ऐसे करीब 250 से अधिक शिक्षकों के मामले होने की आशंका जताई जा रही है। इससे सरकार को लाखों रुपए के राजस्व नुकसान का खतरा बना हुआ है। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक महेश मेहता से बात करनी चाही, लेकिन उनका कोई जबाव नहीं आया।

नियम क्या है?

शिक्षा विभाग के नियमों के मुताबिक, यदि किसी शिक्षक का पदस्थापन सरकार की ओर से किया जाता है, तभी उसे डिस्टेंस अलाउंस के रूप में 10 सीएल/पीएल का लाभ दिया जा सकता है। वहीं, स्वेच्छा से या पसंदीदा स्थान पर करवाए गए तबादले पर यह सुविधा लागू नहीं होती। इसके बावजूद कई शिक्षकों की सर्विस बुक में यह लाभ दर्ज कर दिया गया, जो विभागीय नियमों के विपरीत माना जा रहा है।

भड़कोल स्कूल में खुला मामला

मालाखेड़ा क्षेत्र के अहीरबास भड़कोल स्कूल में रूटीन जांच के दौरान यह मामला सामने आया। सेवानिवृत्ति से पहले संस्था प्रधान मुकेश गर्ग ने शिक्षकों की सर्विस बुक की जांच करवाई तो पाया कि पांच शिक्षकों को नियम विरुद्ध पीएल का लाभ दिया गया था। इसके बाद करीब 60 पीएल समाप्त कर दी गई। यदि इन छुट्टियों का नकदीकरण होता, तो सरकार को करीब दो लाख रुपए का अतिरिक्त भार उठाना पड़ता। समय रहते कार्रवाई होने से राजस्व की हानि टल गई।

विभागीय जांच की जरूरत

शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि जिलेभर के स्कूलों की सर्विस बुक की निष्पक्ष जांच करवाई जाए, तो कई और मामले सामने आ सकते हैं। इससे न केवल नियमों का उल्लंघन उजागर होगा, बल्कि सरकारी खजाने को होने वाले नुकसान पर भी रोक लग सकेगी।

स्कूल में रूटीन चेकिंग के दौरान शिक्षकों की सर्विस बुक में 10 पीएल दर्ज मिलीं, जो नियमों के अनुसार गलत थीं। पांच शिक्षकों की करीब 60 पीएल समाप्त की गई हैं। इससे सरकार के राजस्व की बचत हुई है - मुकेश गर्ग, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक, भड़कोल

शिक्षक अपनी इच्छा से पदस्थापन करवाता है, तो पीएल देय नहीं होती है। सरकार के आदेश से पदस्थापन होता है, तो पीएल देय होती हैं - राजेन्द्र प्रसाद शर्मा, प्रदेश संरक्षक शिक्षक संघ सियाराम