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सरिस्का के लिए खुशखबरी: अगले महीने मिलने वाली है 7 हजार हेक्टेयर नई जमीन, डिजिटल नक्शे का काम हुआ तेज

सरिस्का टाइगर रिजर्व के विस्तार की राह में आ रही सबसे बड़ी बाधा अब दूर होने वाली है। राजस्व विभाग द्वारा डिजिटल नक्शे तैयार किए जाने के बाद, अगले महीने तक रिजर्व को 7 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन मिल सकती है। इससे न केवल जंगल का दायरा बढ़ेगा, बल्कि वन्यजीवों को भी नया ठिकाना मिलेगा।

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फाइल फोटो

अलवर के सरिस्का टाइगर रिजर्व के लिए आने वाला महीना बेहद अहम साबित होने वाला है। लंबे समय से कागजों और विवादों में अटकी करीब 7 हजार हेक्टेयर जमीन अब आधिकारिक तौर पर सरिस्का के नक्शे में शामिल होने जा रही है। राजस्व विभाग इस जमीन के डिजिटल नक्शे (Digital Maps) तैयार करने में जुटा है, जिसके पूरा होते ही जमीन सरिस्का प्रशासन को सौंप दी जाएगी।

दरअसल, सरिस्का की जमीन का नोटिफिकेशन साल 2007-08 में ही जारी हो गया था, लेकिन तकनीकी पेचों के कारण 82 गांवों की करीब 61 हजार हेक्टेयर जमीन सरिस्का के नाम ट्रांसफर नहीं हो पा रही थी। डिजिटल रिकॉर्ड न होने का फायदा उठाकर कई रसूखदारों और खातेदारों ने इस बेशकीमती जमीन पर कब्जा कर लिया था।

अतिक्रमण पर चलेगा डंडा: होटल और रेस्टोरेंट पर संकट

सरिस्का के नाम जमीन ट्रांसफर होने की प्रक्रिया शुरू होते ही उन लोगों की धड़कनें बढ़ गई हैं जिन्होंने जंगल की जमीन पर अवैध कब्जे कर रखे हैं। इस इलाके में बड़े पैमाने पर होटल, रेस्टोरेंट और अन्य कमर्शियल प्रतिष्ठान खड़े कर लिए गए थे।

जब यह मामला एनजीटी (NGT) पहुँचा, तो प्रशासन की नींद टूटी। उच्च स्तरीय कमेटी के फैसले के बाद पिछले 3 महीनों में 54 हजार हेक्टेयर जमीन पहले ही सरिस्का के नाम की जा चुकी है। अब बची हुई 7 हजार हेक्टेयर जमीन के नक्शों में आ रहे 'पेच' को राजस्व विभाग सुलझा रहा है। अलवर उपखंड कार्यालय को इस पूरी प्रक्रिया को फाइनल करने की जिम्मेदारी दी गई है। जैसे ही यह जमीन सरिस्का के खाते में आएगी, प्रशासन यहाँ बने अवैध निर्माणों को ढहाने की कार्रवाई शुरू करेगा।

क्यों जरूरी है यह विस्तार?

सरिस्का में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में उन्हें सुरक्षित और बड़ा इलाका (Territory) चाहिए। जमीन का विवाद सुलझने से:

  • बाघों और अन्य वन्यजीवों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर बनेगा।
  • मानव और वन्यजीव संघर्ष में कमी आएगी।
  • पर्यटन के नए रास्ते खुलेंगे।
  • जंगल की सीमाओं पर हो रहे अवैध खनन और अतिक्रमण पर लगाम लगेगी।

प्रशासन का कहना है कि डिजिटल नक्शे तैयार होते ही सीमांकन (Demarcation) किया जाएगा ताकि भविष्य में दोबारा कोई इस जमीन पर कब्जा न कर सके। अलवर के लोगों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए यह एक बड़ी जीत मानी जा रही है।

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