गर्मी दस्तक से पहले ही अलवर, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ के नदी, नाले, तालाब और बांध रीत गए हैं। सिंचाई विभाग के अंतर्गत आने वाले 22 बांधों में से केवल 3 बांधों में पानी शेष रहा है और बाकी 19 बांध खाली हो गए हैं।
गर्मी दस्तक से पहले ही अलवर, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ के नदी, नाले, तालाब और बांध रीत गए हैं। सिंचाई विभाग के अंतर्गत आने वाले 22 बांधों में से केवल 3 बांधों में पानी शेष रहा है और बाकी 19 बांध खाली हो गए हैं। ऐसे में इन बांधों के आसपास रहने वाले पशु-पक्षियों और जीव-जंतुओं को जल संकट का सामना करना पड़ेगा।
पिछले साल मानसून के दौरान बारिश ने दो साल का रेकॉर्ड तोडा। अलवर की औसत बारिश 555 मिमी है, लेकिन 1100 मिमी से ज्यादा पानी बरसा। इसके बाद भी केवल सिलीसेढ़, मंगलसर और मानसरोवर में पानी शेष रहा है। इन बांधों में भी पानी कम हो रहा है।
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मानसून के दौरान 22 में से 10 बांधों में पानी की आवक हुई, लेकिन मानसून की विदाई के साथ ही पानी कम होने लगा। इसके साथ ही जिला परिषद के अंतर्गत आने वाले 107 बांधों में से अधिकांश बांध सूख चुके हैं। जिले में मानसून की दस्तक जुलाई में होगी।
जयसमंद, रामपुर, जयसागर, देवती, धमरेड़, लक्ष्मणगढ़, बाघेरीखुर्द, जैरोली, खानपुर, हरसौरा, जैतपुर, बावरिया, सिलीबेरी, बिघोता, तुसारी, निम्बाहेड़ी, सारेंखुर्द, समरसरोवर और साबी, रूपारेल आदि नदियों से पानी सूख चुका है। इनका पानी रसातल में पहुंच गया है। बताया जाता है कि कई क्षेत्र सूखे की चपेट में आए हुए हैं। इसमें राजगढ़, मालाखेड़ा, लक्ष्मणगढ़, बानसूर का कुछ क्षेत्र, बहरोड़, गोविंदगढ़ आदि क्षेत्र शामिल हैं। आगामी दिनों इन बांधों और तालाबों में धूल उड़ती नजर आ सकती है।
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