टूटी हुई रेल पटरी से यहां गुजर गई कई यात्री ट्रेने, रेलवे विभाग की लापरवाही फिर आई सामने
अम्बेडकर नगर. रेलवे विभाग के तो जैसे दिन ही खराब चल रहे हैं। विगत कुछ ही दिनों में रेल से कई बड़े हादसे हो चुके हैं और इन हादसों में सैकड़ों लोगों ने अपनी जाने गवां दी हैं, लेकिन रेलवे विभाग पर इन हादसों का कोई असर होता दिखाई नहीं पड़ रहा है।
जिले के अकबरपुर जंक्शन से लगभग 15 किलोमीटर पश्चिम दिशा में कटेहरी स्टेशन के पास ही ट्रेन की पटरी टूटी हुई पाई गई। जब लोगों को इस पटरी के टूटे होने की जानकारी मिली उससे पहले ही साबरमती एक्सप्रेस, मरुधर एक्सप्रेस और जनता एक्सप्रेस सहित कुल चार सवारी ट्रेने टूटी हुई पटरी से गुजर कर अपने गंतव्य की तरफ रवाना हो चुकी थीं। यह तो इश्वर की कृपा रही जो ट्रेन सही सलामत इस टूटी हुई पटरी को पार कर गईं और कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ, नहीं तो यह हादसा कानपुर देहात जैसे हादसे से कम न होता।
इस मामले में रेलवे विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आयी है, यहां टूटी पटरी से कई ट्रेने गुजर गयी लेकिन विभाग को इसकी जानकारी तक नहीं हुई। मीडिया द्वारा जब इसकी जानकारी दी गयी तब जाकर विभाग जागा और आनन-फानन में रेलवे विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंच कर पटरी को ठीक कराने की बात कहना शुरू कर दिए। पटरी कटेहरी रेलवे स्टेशन से थोड़ी दूर पर ही टूटी थी, लेकिन यहां भी विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को पहुंचने में आवश्यकता से ज्यादा समय लग गया।
स्टेशन मास्टर इसे बता रहे हैं सामन्य बात
ट्रेन की पटरी टूटी होने के बाद भी कई ट्रेने सकुशल निकल गईं और अम्बेडकरनगर में कोई बड़ा ट्रेन हादसा होने से बच गया, जबकि यह मामला कटेहरी रेलवे से थोड़ी दूर का ही था और इसी टूटी हुई पटरी से कई ट्रेनें गुजरती रही। हैरानी की बात है कि रेलवे विभाग को इसकी जानकारी नहीं हुई, जबकि नियमानुसार प्रतिदिन एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन के बीच पटरी की जांच विभाग के अधिकारीयों और कर्मचारियों द्वारा की जाति है। वह तो गनीमत यह रही कि मीडिया को इसकी जानकारी मिल गई और उसके द्वारा जब इसकी जानकारी रेलवे को दी गयी तब विभाग जागा। जानकारी के बाद रेलवे के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे और मरम्मत कर ट्रेनों को काशन देकर निकाला गया।
इस मामले में अकबरपुर रेलवे स्टेशन के अधीक्षक जियालाल ने बताया कि जैसे ही इसकी जानकारी हुई ट्रेनों को काशन देकर ट्रेनों को निकाला जा रहा है और पटरी की मरम्मत करायी जा रही है। उनका कहना है कि ट्रेनों की स्पीड कम करा दी गई है, जिससे खतरे की सम्भावना कम हो जाती है। अब सवाल यह उठता है कि टूटी हुई पटरी से कई ट्रेने गुजर गईं और अगर कोई बड़ा हादसा होता तो आखिर इसकी जिम्मेदारी कौन लेता।