अम्बेडकर नगर

योगी आदित्यनाथ की इस योजना से बदलेगी यूपी के इस जिले की तस्वीर, लोगों में जगी उम्मीद

योगी आदित्यनाथ की इस योजना से बदलेगी यूपी के इस जिले की तस्वीर, लोगों में जगी उम्मीद

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ambedkar nagar

प्रदीप मौर्य

अम्बेडकर नगर. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के तमाम जिलों में छोटे और मंझोले उद्योगों के विकास के लिए एक जिला एक उत्पाद के विकास की जो योजना बनाई है, उसकी घोषणा भी एक जनवरी 2018 को कर दी है और प्रदेश के लगभग 26 ऐसे जिलों का चयन किया गया है, जहां कुछ विशेष तरह का उत्पादन किया जाता है और इन जिलों की पहचान वहां के उत्पादन से होती है।

मुख्यमंत्री की इस योजना में अम्बेडकर नगर का कपड़ा उत्पादन भी शामिल है। सरकार इस योजना के माध्यम से कपड़ा उत्पादन को भी विकास के पाठ पर आगे लाना चाहती है और इसके लिए बुनकरों के सामने आने वाली समस्याओं को दूर करने का पूरा प्रयास होगा। सरकार ने एक जिला एक उत्पाद की जो योजना बनाई है उसके अनुसार इस योजना को 24 जनवरी को लांच किया जाना है। सरकार की इस योजना से अम्बेडकर नगर के बुनकरों में उम्मीद की एक किरण जगी है और वर्षों से इस पेशे में जुड़े बुनकरों को सरकार की तरफ से कोई मदद न मिल पाने के कारण इस व्यवसाय को आगे ले जाने में जो दिक्कतें आती रही हैं, बुनकरों को लगने लगा है कि उनकी यह समस्या अब सरकार की योजना से दूर होगी।

अम्बेडकर नगर जिले का कपड़ा व्यवसाय

अम्बेडकर नगर जिले में कपड़ा उत्पादन का काफी पुराना इतिहास है। आजादी से पहले से यहां कपड़े का उत्पादन होता रहा है और यहां का तैयार कपड़ा न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि देश के कोने कोने तक जाता रहा है। इसके अलावा पड़ोसी देश नेपाल में भी यहां के माल की न सिर्फ खपत ही थी बल्कि यहां के बहुत सारे व्यवसाई नेपाल में ही रहकर अपना व्यवसाय करते रहे और आज भी सैकड़ों परिवार इस व्यवसाय के माध्यम से अम्बेडकर नगर और नेपाल के बीच इस व्यवसाय के तार को जोड़े हुए हैं।

आजादी से पहले देश में मशीनरी युग इस जिले तक नहीं पहुंच पाया था और उस समय लोग यहां पर हथ करघा पर कपड़े का उत्पादन किया करते थे, लेकिन 1952 के आसपास ऐसा माना जाता है कि पहली बार तत्कालीन फैजाबाद जिले के टांडा कस्बे में पावर लूम का लगना शुरू हुआ। फैजाबाद जिले से अलग होकर अम्बेडकर नगर जिला बना, जो अब पूर्ण रूप से कपड़ा उत्पादन के तौर पर प्रदेश का सबसे बड़ा जिला है। जिले के टांडा कस्बे से शुरू हुआ यह व्यवसाय अब इल्तेफात गंज, शहजाद पुर, जलालपुर, भूले पुर, नारियांव और नेवारी सहित अन्य कई ग्रामीण क्षेत्रों में पावर लूम पर लुंगी, गमछा, शर्टिंग, अरबी रुमाल, स्टोल, साड़ियां, चादरें और बहुत तरह के कपड़े का उत्पादन किया जाता है।

इस तरह होता है यहां कपड़े का उत्पादन

अम्बेडकर नगर जिले में कपड़े का उत्पादन अब पूरी तरह से पावर लूम पर ही होता है और यहं से हथकरघा पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। कपड़े के उत्पादन के बारे में अधिक जानकारी के लिए बुनाई के व्यवसाय से जुड़े और बुनकरों के हितों के लिए काम करने वाली संस्था बुनकर एकता विकास परिषद् के अध्यक्ष मोहम्मद कासिम अंसारी से पत्रिका की बात हुई, जिसमें उन्होंने बताया कि टांडा कस्बे समेत पूरे अम्बेडकर नगर जिले में एक लाख से अधिक पावर लूम पर कपड़े का उत्पादन किया जाता है, जिस पर लाखों मीटर कपड़ा प्रतिदिन तैयार होता है। यहां के कपड़े की खासियत बताते हुए उन्होंने कहाकि यहां तैयार कपड़ा इतना सस्ता है कि देश में कहीं भी इतना सस्ता कपड़ा नहीं मिलता।

उन्होंने बताया कि जिस तरह से पावर लूम की संख्या है और एक पावर लूम पर प्रतिदिन का जिस प्रकार का उत्पादन है, अगर उसका आंकलन किया जाय तो इस व्यवसाय का सालाना टर्न ओवर पांच सौ करोड़ रुपये से अधिक का रहता है | कासिम अंसारी ने बताया कि इस व्यवसाय से जिले के डायरेक्ट और इनडायरेक्ट रूप से 10 लाख से अधिक लोग जुड़े हुए हैं।

सूरत, भिवंडी और दक्षिण भारत जैसी सुविधाएं न मिलने से इस व्यवसाय का नहीं हुआ विकास

देश में कपड़ा उत्पादन का जो हब माना जाता है, उसमे गुजरात का सूरत, अहमदाबाद, महाराष्ट्र का भिवंडी और दक्षिण भारत का इरोड और सेलम जैसे कई शहर हैं। इन शहरों में वहां की सरकारों ने बुनकरों को तमाम सहूलियतें दे रखी हैं और इन जगहों पर अब साधारण पावर लूम के बजाय आटोमैटिक पावर लूम पर कपड़े का उत्पादन किया जाता है, जो साधारण पावर लूम पर तैयार कपडे के मुकाबले काफी अच्छे होते हैं।

प्रदेश में कपड़ा व्यवसाय का विशेष महत्व होने के बावजूद यहां पर किसी भी सरकार ने आजतक इस व्यवसाय को अन्य शहरों के मुकाबले बढ़ाने के लिए कोई ख़ास कदम नहीं उठाया। कासिम अंसारी बताते हैं कि साधारण पावर लूम पर यहां का कपड़ा तैयार करने के कारण गरीबों में यहां का कपड़ा तो प्रचलित है, लेकिन बड़े वर्ग में लोग इसे कम पसंद करते हैं। उनका कहना है कि अम्बेडकर नगर में एक लाख से अधिक पावर लूम होने के बाद भी यहां न तो ढंग की फिनिशिंग मशीन है, न डाइंग की कोई सुविधा है और न ही सरकार की तरफ से इस दिशा में अभी तक कोई प्रयास किया गया था।

योगी सरकार के फैसले का बुनकर कर रहे हैं सम्मान

प्रदेश की योगी सरकार जिस प्रकार से कुटीर और मझले उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एक जिला एक उत्पाद की योजना की शुरुआत करने जा रही है, उसके अनुसार अम्बेडकर नगर जिले को कपड़ा व्यवसाय के रूप में चयनित किये जाने और यहां के इस उद्योग को राष्ट्रीय स्तर पर ले जाने की जानकारी होने पर यहां के बुनकरों में काफी खुशी है। व्यवसाई कासिम अंसारी का कहना है कि पहली बार कोई सरकार इस जिले के बुनकरों के लिए इतनी बड़ी योजना लांच करने जा रही है और उन्होंने उम्मीद जताई कि इसका दूरगामी परिणाम निकलेगा और यहां के बुनकरों के अच्छे दिन आयेंगे।

कासिम अंसारी ने पिछले 16 अगस्त को केन्द्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति इरानी द्वारा दिल्ली में बुलाये गए पूरे देश के बुनकर प्रतिनिधियों की बैठक में भी शामिल होकर आये हैं, जिसकी चार्चा करते हुए उन्होंने कहाकि स्मृति इरानी भी इस क्षेत्र में उत्तर प्रदेश और खासकर अम्बेडकर नगर के कपड़ा व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए काफी तत्पर दिखाई पड़ी हैं। कासिम अंसारी ने सुझाव दिया कि प्रदेश सरकार अम्बेडकर नगर में बुनकरों को कच्चे माल के डिपो के साथ साथ यहां फिनिशिंग और डाइंग मशीन को लगवा दे, इसके अलावा कमजोर और गरीब बुनकरों लिये सब्सिडी पर नई टेक्नालाजी में मदद करे तो बुनकरों और कपड़ा व्यवसाय को आगे बढ़ाया जा सकता है।

Updated on:
07 Jan 2018 11:33 am
Published on:
07 Jan 2018 11:20 am
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