
अम्बेडकर नगर। किसी महिला की हत्या सिर्फ इस लिए कोई व्यक्ति कर दे, क्योंकि वह नशे का आदी है और महिला से दो सौ रुपये की मांग किया हो, लेकिन महिला ने रुपये देने से इनकार कर दिया तो वह व्यक्ति महिला की चाकू मारकर हत्या कर दिया। पुलिस की इस थ्योरी और हत्याकांड के खुलासे पर कोई अविश्वास क्यों न करे, वह भी तब जबकि महिला एक वरिष्ठ फौजदारी वकील की पत्नी रही हो और उनके घर मे ही घुसकर एक ऐसा व्यक्ति हत्या इसलिए कर दे कि वह अपने नशे की पूर्ति के लिए वकील की पत्नी से दो सौ रुपये मांगने गया था और पैसे देने से इनकार कर देने पर हत्या कर दिया, जबकि उस व्यक्ति से पहले से ही रंजिश रही हो।
घटना जिले के टांडा कोतवाली क्षेत्र के पुंथर गांव की है। जहां 13 अप्रैल को जिले के एक नामी अधिवक्ता जुनेद अहमद जब जिला मुख्यालय पर स्थित जिला अदालत पर न्यायिक कार्य कर रहे थे, उसी समय दोपहर में उनके घर में घुसकर अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियार से उनकी पत्नी की निर्मम हत्याकर दी। पुलिस ने इस घटना का खुलासा 11 दिन बाद तो किया, लेकिन घटना के पीछे जो कारण बयान किया वह किसी के गले नही उतर रहा है। यहां तक कि अधविवक्ता जुनेद अहमद भी इस खुलासे को पुलिस की मन गढ़ंत कहानी बता रहे हैं। पुलिस के इस खुलासे को शर्मनाक बताते हुए जिले भर के अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत होकर आंदोलन कर रहे हैं और पूरे घटना की जांच सीबीआई से कराने की मांग कर रहे हैं।
अनिश्चित कालीन हड़ताल पर गए अधिवक्ता
पुलिस के इस हत्याकांड खुलासे के बाद जिले भर के अधिवक्ताओं ने आंदोलन की राह पकड़ते हुए अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले गए हैं, जहां जिला मुख्यालय पर प्रैक्टिस करने वाले सैकड़ों अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन कर शासन से इस हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। वही टांडा तहसील के अधिवक्ताओं ने इस हत्याकांड को लेकर अपनी अलग रणनीति बनाते हुए तहसील में ही धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
सीएमपीएम के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे के साथ कानून व्यवस्था पर खड़े किए सवाल
जिला मुख्यालय पर बाबा साहब की मूर्ति के पास धरने पर बैठे सैकड़ों अधिवक्ताओं ने उग्र प्रदर्शन करते हुए जहां खुलेआम सीएम और पीएम के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगाए वहीं टांडा तहसील के अधिवक्ताओं ने धरने के दौरान शासन और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर भाषणबाजी की। अधविवक्ता दिलीप मांझी ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि इस शासन व्यवस्था में पुलिस पूरी तरह निरंकुश हो चुकी है। कहीं भी कानून व्यवस्था जैसी चीज नहीं बची है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से एक वकील की पत्नी की हत्या का खुलासा पुलिस ने किया है, उससे साफ पता चलता है कि इस मामले में पुलिस ने अनैतिक लाभ लेकर काम कर रही है। धरने को सत्य प्रकाश, जावेद सिद्दीकी, महेंद्रनाथ श्रीवास्तव, अशरफ अंसारी, नरेंद्र पांडेय, अजय श्रीवास्तव सहित दर्जनों अधिवक्ताओं ने संबोधित किया और इस हत्याकांड की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।