अंबिकापुर

अंबिकापुर के विश्वविद्यालय में प्रशासनिक टकराव, कुलपति बोले- निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करते कुलसचिव

Sant Gahira Guru University: अंबिकापुर के संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में कुलपति और कुलसचिव के बीच विवाद गहरा गया है। नियुक्ति की योग्यता पर सवाल उठने के बाद राजभवन ने नियमित कुलसचिव की पदस्थापना के लिए उच्च शिक्षा विभाग को दोबारा पत्र लिखा है।
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Registrar Appointment Controversy
संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में बढ़ा विवाद (Photo Source- Patrika File Photo)

Registrar Appointment Controversy: छत्तीसगढ़ के संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में कुलपति और कुलसचिव के बीच विवाद गहरा गया है। कुलसचिव की नियुक्ति के लिए निर्धारित योग्यता को लेकर कुलपति प्रो. डॉ. राजेंद्र लाकपाले ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने शासन से वर्तमान कुलसचिव डॉ. शारदा प्रसाद त्रिपाठी के स्थान पर नियमित कुलसचिव की पदस्थापना का अनुरोध किया है। मामला अब राजभवन तक पहुंच चुका है।

राजभवन की ओर से उच्च शिक्षा विभाग को नियमानुसार कार्रवाई के लिए दोबारा पत्र भेजे जाने के बावजूद अब तक कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। विश्वविद्यालय की स्थापना को 18 साल हो चुके हैं, लेकिन यहां अब भी बुनियादी सुविधाओं और अधोसंरचना का अभाव है। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारियों के बीच बढ़ते टकराव ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली और विकास को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कुलपति ने नियुक्ति की योग्यता पर उठाए सवाल

कुलपति प्रो. डॉ. राजेंद्र लाकपाले का कहना है कि पदभार संभालने के बाद उन्हें कुलसचिव के कामकाज और अनुभव को लेकर समस्याएं महसूस हुईं। इसके बाद उन्होंने नियुक्ति से संबंधित योग्यता की जानकारी जुटाई। उनके अनुसार, जांच में यह बात सामने आई कि वर्तमान कुलसचिव शासन की ओर से निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करते हैं। इसके बावजूद उन्हें इस पद पर नियुक्त किया गया।

कुलपति ने इस संबंध में राज्य सरकार और राजभवन को स्थिति से अवगत कराया है। उन्होंने विश्वविद्यालय में नियमित कुलसचिव की नियुक्ति की मांग की है। अब इस मामले में शासन स्तर पर निर्णय होना है।कुलपति ने यह आरोप भी लगाया है कि विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के उनके प्रयासों के कारण कुछ ठेकेदारों के साथ मिलकर उनके खिलाफ अनर्गल आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, ये आरोप कुलपति का पक्ष हैं। मामले में संबंधित पक्षों के बीच विवाद का अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है।

राजभवन ने दोबारा लिखा उच्च शिक्षा विभाग को पत्र

कुलसचिव की नियुक्ति को लेकर विवाद बढ़ने के बाद राजभवन ने भी मामले में हस्तक्षेप किया है। राज्यपाल के अवर सचिव की ओर से छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र भेजकर नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। पत्र में डॉ. शारदा प्रसाद त्रिपाठी के स्थान पर नियमित कुलसचिव की पदस्थापना का आदेश तत्काल प्रभाव से जारी करने का अनुरोध किया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि राज्यपाल एवं कुलाधिपति के निर्देशानुसार इस संबंध में दोबारा पत्र लिखा जा रहा है।

राजभवन के पत्र में 24 जून 2026 को जारी पुराने पत्र का संदर्भ भी दिया गया है। इसके साथ ही कुलपति की ओर से 18 जुलाई 2026 को भेजे गए पत्र का उल्लेख करते हुए संबंधित दस्तावेज संलग्न किए गए हैं। इसके बावजूद अब तक इस मामले में अंतिम निर्णय नहीं हो सका है। ऐसे में विश्वविद्यालय में कुलसचिव की नियुक्ति को लेकर बना विवाद लगातार बना हुआ है।

कुलसचिव का जवाब- व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए काम नहीं करूंगा

दूसरी ओर, कुलसचिव डॉ. शारदा प्रसाद त्रिपाठी ने अपनी नियुक्ति का बचाव किया है। उनका कहना है कि शासन ने उन्हें विश्वविद्यालय के हित में काम करने के लिए पदस्थ किया है। वह शासन के नियमों और प्रावधानों के अनुसार काम कर रहे हैं, न कि किसी व्यक्ति के निजी स्वार्थ को पूरा करने के लिए। कुलसचिव के अनुसार, मुख्यमंत्री के अनुमोदन के बाद उनकी नियुक्ति हुई है और उन्हें उच्च शिक्षा विभाग में काम करने का लंबा अनुभव है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों के व्यक्तिगत हित पूरे नहीं हो रहे हैं, इसलिए उनके खिलाफ सवाल उठाए जा रहे हैं। इस तरह कुलपति और कुलसचिव दोनों ने अपनी-अपनी दलीलें रखी हैं। एक ओर कुलपति नियुक्ति की निर्धारित योग्यता और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं कुलसचिव अपनी नियुक्ति को शासन की स्वीकृति और अपने अनुभव के आधार पर उचित बता रहे हैं।

18 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं का इंतजार

संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2008 में हुई थी। स्थापना के बाद प्रदेश में कई नए विश्वविद्यालय खुले और अनेक संस्थानों ने अधोसंरचना के क्षेत्र में विस्तार किया, लेकिन संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय अब भी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। विश्वविद्यालय में लंबे समय तक प्रशासनिक कामकाज सीमित संसाधनों और अस्थायी व्यवस्थाओं के सहारे संचालित होता रहा।

स्थिति यह है कि विश्वविद्यालय का शिक्षण विभाग आज भी अंबिकापुर के मणिपुर स्थित हायर सेकेंडरी स्कूल के अतिरिक्त कमरों में चल रहा है। विश्वविद्यालय के सामने केवल भवनों की कमी ही चुनौती नहीं है। अकादमिक गतिविधियों, खेलकूद और अन्य शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार को लेकर भी अपेक्षाएं बनी हुई हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक नेतृत्व के बीच विवाद से संस्थान के विकास की प्राथमिकताओं पर असर पड़ने की आशंका है।

भकुरा परिसर में भी सुविधाओं की कमी

विश्वविद्यालय को नए विकसित हो रहे परिसर ग्राम भकुरा में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। हालांकि, नए परिसर में भी कई बुनियादी सुविधाओं का अभाव बताया जा रहा है। अंबिकापुर से भकुरा स्थित विश्वविद्यालय तक पहुंचने के लिए सुगम आवागमन की व्यवस्था नहीं है। रामानुजगंज रोड से गांव के रास्ते विश्वविद्यालय तक जाने वाली कच्ची सड़क का निर्माण भी अब तक पूरा नहीं हो पाया है। इसके अलावा परिसर में कई भवन अधूरे पड़े हैं। इन समस्याओं के कारण विद्यार्थियों और विश्वविद्यालय से जुड़े लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। परिसर में सुविधाओं के विस्तार और अधूरे निर्माण कार्यों को पूरा करना विश्वविद्यालय की प्रमुख जरूरतों में शामिल है।

प्रशासनिक विवाद के बीच छात्रों के हित पर सवाल

संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय में कुलपति और कुलसचिव के बीच चल रहा विवाद अब नियुक्ति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली से आगे बढ़कर संस्थान के समग्र विकास से जुड़ा मुद्दा बन गया है। एक ओर नियमित कुलसचिव की नियुक्ति को लेकर शासन और राजभवन के स्तर पर पत्राचार जारी है, तो दूसरी ओर विश्वविद्यालय को बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की जरूरत है।

अब निगाहें उच्च शिक्षा विभाग के फैसले पर टिकी हैं। नियुक्ति विवाद का समाधान होने के साथ विश्वविद्यालय में प्रशासनिक स्थिरता, अधूरे भवनों के निर्माण, बेहतर आवागमन और शैक्षणिक सुविधाओं के विकास पर ध्यान देना भी जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल मिल सके।

Updated on:
10 Oct 2026 03:25 pm
Published on:
10 Oct 2026 02:50 pm