अंबिकापुर

पिता ने पूछा- और कितना ब्लड चाहिए तो Doctor ने बीमार बेटी के साथ किया शर्मसार करने वाला काम

26 सितंबर को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 15 वर्षीय किशोरी को कराया गया था भर्ती, डॉक्टर ने सवाल पूछने की दी इतनी बड़ी सजा
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Girl patient
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अंबिकापुर/वाड्रफनगर. जिस डॉक्टर ने ड्यूटी शुरू करने से पहले किसी भी हाल में मरीज की जान बचाने की शपथ ली हो, अगर उसका ही व्यवहार मरीज की जान पर भारी पड़ जाए तो इंसान इस जमीन पर किसे भगवान का दर्जा देगा। ऐसी ही कुछ स्थिति मेडिकल कॉलेज अस्पताल में देखने को मिली।

माता-पिता ने अपनी 15 वर्षीय बेटी को खून की कमी की वजह से मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर में भर्ती कराया था। इसी बीच उसका इलाज कर रहे डॉक्टर ने उसे इस कारण से डिस्चार्ज कर दिया, क्योंकि उसके माता-पिता ने उनसे यह पूछने की गुस्ताखी कर दी कि 'और कितना खून चढ़वाना है।'


जमीन पर इंसान डॉक्टर को भगवान का दर्जा देता है। इसकी वजह से वह न केवल अपना बल्कि पूरी परिवार के जीवन बचाने एक डॉक्टर की तरफ बड़ी ही आशा से देखता है लेकिन अगर डॉक्टर का ऐसा रवैय्या जो जान-बूझकर किसी मरीज के जान पर बन पड़े तो उस डाक्टर को क्या कहेंगे। ऐसी ही कुछ स्थिति मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हैं।

जहां कुछ डॉक्टर मरीजों को भगवान भरोसे छोड़कर सिर्फ इसलिए अस्पताल से बाहर का रास्ता दिखा देते हैं, क्योंकि परिजन उनसे सवाल कर देते हैं। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के ग्राम डिंडो निवासी धनुकधारी ने अपनी 15 वर्षीय पुत्री संगीता को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में 26 सितम्बर को भर्ती कराया था।

अस्पताल में उसका स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद उसके शरीर में खून की कमी बताई गई थी और उसे भर्ती कर इलाज किया जा रहा था। बच्ची को काफी तेज बुखार था। इसकी वजह से डॉक्टर की सलाह पर परिजन ने एक यूनिट ब्लड भी चढ़वाया लेकिन इसके बाद भी बुखार कम नहीं हुआ।

इसपर परिजन ने संबंधित डॉक्टर से जाकर बस इतना पूछ दिया कि बच्ची का बुखार कम नहीं हुआ है डाक्टर साहब, और कितना ब्लड की जरूरत है। बस इतना पूछना बच्ची के माता-पिता को भारी पड़ गया।

इतनी सी बात पर मरीज का डिस्चार्ज पेपर डॉक्टर द्वारा तैयार कर दिया गया और परिजन को थमा दिया गया। डिस्चार्ज टिकट बनने के बाद बिना कुछ देखे स्वास्थ्य कर्मचारियों ने भी बच्ची व परिजन को वार्ड से जाने का फरमान सुना दिया।


कराहती रही बच्ची लेकिन डॉक्टरों को नहीं आई दया
डॉक्टर द्वारा बच्ची का डिस्चार्ज पेपर तैयार कर रात में ही मेडिकल कॉलेज अस्पताल से बाहर निकाल दिया गया। आर्थिक रूप से कमजोर माता-पिता बच्ची के जान की सलामती के लिए वहां से उसे लेकर निकल तो गए, लेकिन उसे कहीं ले जाने के लिए उनके पास रुपए भी नहीं थे। इस दौरान बच्ची बुखार में तप रही थी और दर्द से कराह रही थी। लेकिन डॉक्टरों की मानवता नहीं जागी।


गांव के स्कार्पियो चालक की पड़ी नजर तो की मदद
परिजन डॉक्टर के फरमान के आगे मजबूर थे। डिस्चार्ज टिकट मिलने के बाद वे घर के लिए निकल पड़े और अंबिकापुर से वाड्रफनगर किसी तरह बस से पहुंचे लेकिन इसके आगे जाने के लिए उनके पास कोई साधन नहीं था। इसकी वजह से वे सड़क पर पहुंच गए। इस दौरान उन्होंने अपने एक परिचित को गांव में फोन किया।

इस बीच उनके गांव के ही एक स्कार्पियो चालक की नजर उनपर पड़ी तो उसने उन्हें वाहन में बैठा लिया। बताया जा रहा है कि आज भी बच्ची को बुखार से राहत नहीं मिल सकी है।


ली जाएगी जानकारी
इस संबंध में अभी मुझे कोई जानकारी नहीं है लेकिन मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर इस तरह की हरकत नहीं करते हैं। संबंधित डॉक्टर से इस संबंध में जानकारी ली जाएगी।
डॉ. रवि दास, अस्पताल अधीक्षक, मेडिकल कॉलेज अस्पताल

Published on:
01 Oct 2018 06:54 pm
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