अंबिकापुर

सीएमएचओ दफ्तर में लंबे समय से चल रहा ये घिनौना खेल, अफसर कह रहे- मुझे तो पता ही नहीं

संदेह के घेरे में है दफ्तर के कर्मचारी की भूमिका, शासन को हर महीने मेडिसिन में लग रही लाखों रुपए की चपत, सीएमएचओ बोले- जांच कराएंगे
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Updated: 10 Mar 2018, 2:52 PM IST
foul play in medicine
Medicine

अंबिकापुर. अंबिकापुर के सीएमएचओ कार्यालय के मेडिसिन स्टोर के रिकॉर्ड में हर महीने हेरा-फेरी कर शासन को लाखों रुपए का चूना लगाया जा रहा है। इसकी भनक तक वहां बैठे आला अधिकारियों को नहीं है। जितने मेडिसिन का ऑर्डर स्टोर से एजेंसी को दिया जाता है, उससे अधिक रिकॉर्ड में चढ़ाकर बाद में स्वास्थ्य केंद्रों में भेजी जानी वाली दवाइयों में एडजस्ट करने का खेल किया जाता है। यह सब यहां के स्टोर कीपर द्वारा किया जा रहा है।


दवाइयों के स्टॉक रजिस्टर में हेरा-फेरी कर अंबिकापुर सीएमएचओ ऑफिस के कर्मचारी द्वारा शासन को लाखों रुपए की चपत लगाई जा रही है। बड़ी ही होशियारी से दवाई एजेंसियों द्वारा सीएमएचओ कार्यालय के मेडिसिन स्टोर में सप्लाई की गई दवाइयों की मात्रा में वहां के कर्मचारियों द्वारा हेरा-फेरी कर एडजस्ट करने का खेल किया जा रहा है।

इसकी जानकारी कुछ डॉक्टरों को लगने के बाद उनके द्वारा विरोध भी किया गया लेकिन स्टोर कीपर ने डॉक्टरों की शिकायत की तरफ ध्यान नहीं दिया। इससे सीएमएचओ कॉर्यालय के स्टोर कीपर की मनमानी बढ़ती ही चली गई। अब तक उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई और रिकॉर्डों में हेराफेरी कर प्रत्येक माह शासन को लाखों रुपए का नुकसान पहुंचाया जा रहा है।


एक ही बैच नम्बर की दवाई को रिकॉर्ड में दो जगह चढ़ा दिया
बिलासपुर की एक दवाई एजेंसी को सीएमएचओ कार्यालय द्वारा आईव्ही सेट सप्लाई का ऑर्डर दिया गया था। फर्म द्वारा बैच नम्बर 068351 का 11 हजार नग आईव्ही सेट सप्लाई भी किया गया। इस स्टॉक को स्टोर कीपर द्वारा प्राप्त भी किया गया।

लेकिन इसके बाद रिकॉर्ड पंजी में इसे 31 मई 2017 की तिथि पर दो जगह 11-11 हजार नग की इंट्री कर दी गई और लगभग शासन को लगभग 98175 रुपए का नुकसान पहुंचाया गया है। लेकिन 6 माह का समय बीत गया और अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।


रिसीव कराने के बाद होती है हेराफेरी
किसी भी स्वास्थ्य केंद्र को जब सीएमएचओ कार्यालय के मेडिकल स्टोर से दवाइयां दी जाती हंै, तो उसका व्हाउचर तीन प्रति में काटा जाता है। दो प्रति संबंधित केंद्र के अधिकारी अथवा बीएमओ को दी जाती है। जबकि एक प्रति सीएमएचओ कार्यालय में रखी जाती है।

जब स्वास्थ्य केंद्र को दवाइयां भेजी जाती हैं तो उन्हें दिए जाने वाले व्हाउचर में सही-सही एंट्री की जाती है। लेकिन बाद में सीएमएचओ कार्यालय के स्टॉक पंजी में अलग से दवाइयों की संख्या बढ़ा कर उतने मात्रा शासकीय रिकॉर्ड में एडजस्ट करने का खेल किया जाता है। ऐसे ही कुछ दस्तावेज बरगीडीह, धौरपुर व गुमगराकला के सामने आए हंै।


वरिष्ठ फॉर्मेसिस्ट के बावजूद जूनियर संभाल रहे प्रभार
संभाग में सवलसाय मरावी व सुनील नाग नाम के सबसे सीनियर फार्मासिस्ट पदस्थ हंै। इसके बावजूद इनकी जगह पर 2009 बैच के फार्मासिस्ट को स्टोर का प्रभार सौंप दिया गया है। जबकि नियमानुसार सबसे सीनियर को स्टोर का प्रभार दिया जाना चाहिए।


मामले की कराई जाएगी जांच
सेन्ट्रल ऑडिट टीम द्वारा कुछ दिन पूर्व आडिट की गई है। इस बीच बैठक में मै बाहर आ गया था। पूरे मामले की जांच कमेटी गठित कराकर कराई जाएगी। जल्द ही इसकी सत्यता सामने आ जाएगी।
डॉ. एनके पांडेय, सीएमएचओ, सरगुजा

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