चुनावों को लेकर एक अध्ययन किया गया था, जिससे पता चला है कि सोशल मीडिया पर इस बार गलत सूचपाएं तेजी से फैल रही हैं।
अमरीका में मध्यावधि चुनाव होने जा रहे हैं। ऐसे में अमरीकी कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि उनके पास चुनावी ढांचे को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों के कोई संकेत नहीं हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा है कि अमरीकियों को रूस की फर्जी खबरें फैलाने की कोशिशों को लेकर चौकन्ना रहना चाहिए।
चुनावों को लेकर एक अध्ययन किया गया था, जिससे पता चला है कि सोशल मीडिया पर इस बार गलत सूचपाएं 2016 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान प्रसारित की गई सूचनाओं से ज्यादा तेजी से फैल रही हैं। इसी के मद्देनजर यह ऐलान किया गया था। बता दें, रूस पर डोनाल्ड ट्रंप के पक्ष में विशाल प्रचार अभियान चलाकर राष्ट्रपति पद के चुनाव को प्रभावित करने का आरोप है।
गृह सुरक्षा मंत्री कर्स्टजेन नीलसन, अटॉर्नी जनरल जेफ सेशन्स, राष्ट्रीय खुफिया निदेशक डेन कोट्स और एफबीआई निदेशक क्रिस्टोफर रे ने एक संयुक्त बयान जारी करके कहा कि- 'इस वक्त हमारे पास ऐसे कोई संकेत नहीं है कि हमारे राष्ट्र के चुनावी ढांचे पर कोई संकट आए। मतदान भी किसी तरह से बाधित होने के संकेत नहीं हैं। न ही मतगणना प्रभावित होने या फिर मतों के मिलान में कोई रुकावट के संकेत हैं।'
बयान में कहा गया है कि- 'इस सब के बावजूद अमरीकियों को सजग रहना होगा कि विदेशी कर्ता- खासकर रूस-मतभेद पैदा करने के मकसद से लोगों की भावनाओं और मतदाताओं के बोध को प्रभावित करने का प्रयास कर सकता है।'