
नई दिल्ली। मंगल ग्रह से 1.3 लाख भारतीयों के लिए एक बुरी खबर आई है। मंगल ग्रह पर रिसर्च कर रहे अमरीकी वैज्ञानिकों ने खुलासा किया है कि मंगल पर जिस गहरे धारियों को अबतक पानी समझा जा रहा था, वो पानी नहीं बल्कि 'रेत' है।
गहरी धारियां पानी नहीं रेत
अमरीकी वैज्ञानिकों के रिसर्च से निकल आई इस खबर ने 2015 में आई उस खबर पर पानी फेर दिया है, जिसमें यह दावा किया गया था कि मंगल ग्रह के ढलानों पर पानी है । एरिजोना के वैज्ञानिकों ने 'नेचर जियोसाइंस' जर्नल में एक रिपोर्ट जमा की है। रिपोर्ट में उन्होंने ये दावा किया कि मंगल ग्रह पर ये जो गहरी धारियां हैं वो रेत के प्रवाह मालूम होती हैं, ना कि पानी के।
अगर पानी हुआ तो भी जीवन संभव नहीं
वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि अगर मंगल पर पानी मौजूद हुआ भी तो उसकी मात्रा बहुत कम होगी। ऐसे में वहां किसी तरह के जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती।
नासा बोला- चट्टान के नीचे पानी संभव
नासा ने इस बात पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ' इस अध्ययन से ये कहीं साफ नहीं हो रहा कि मंगल ग्रह पर पानी बिल्कुल नहीं है।' नासा के तरफ से दिए बयान में मंगल प्रोजेक्ट के हेड माइकल मेयर ने यह आशंका जताई कि 'हो सकता है पानी चट्टानों के नीचे हो'।
मंगल ग्रह के करीब 10 जगहों का लिया जायजा
एरिजोना के वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह के करीब 10 जगहों का अध्धयन किया। उन्हें वहां भी वैसी ही धारियां दिखी जैसे पृथ्वी के रेत के टीलों वाली जगहों पर मौजूद हैं। इसी आधार पर उन्हें इस बात का संकेत मिला कि मंगल पर मौजूद धारियां पानी नहीं बल्कि रेत हैं।
वैज्ञानिकों ने कहा कि ये जो चमकीलें परत हैं। ये सिर्फ गर्मियों में दिखती हैं और उसके बाद गायब हो जाती हैं। कभी ये एक जगह ज़्यादा इकट्ठा हों तो सतह उभरी हुई नजर आती है। इन सभी बातों से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि वो पानी नहीं रेत है। इन दावों से मंगल ग्रह पर पानी के मौजूद होने के कयासों को साबित करने के लिए बेशक और गहरे अध्धयन की मांग नजर आ रही।
मंगल पर जाना चाहते थे 1.3 लाख भारतीय
बहरहाल, मई 2018 में नासा द्वारा आयोजित 'ट्रिप टू मार्स' में करीब 1.3 लाख भारतीय लोगों ने नामांकन कराया था। अब इस तरह के खबर उन लोगो के लिए निराशा की बात है।