अमरीका सरकार की यह नई नीति 11 सितंबर से प्राप्त तमाम आवेदनों पर लागू होगी। यह नीति एच-1बी वीजा के आवेदकों के लिए मुश्किल बन सकती है।
नई दिल्ली। अमरीका में वीजा को लेकर चल रहे बवाल के बीच भारतीयों समेत दूसरे देशों के लोगों के लिए एक बड़ी मुसीबत आ गई है। दरसअल डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने आव्रजन अधिकारियों (इमिग्रेशन ऑफिसर) को यह अधिकार दे दिया है कि वे कुछ परिस्थितियों में वीजा आवेदनों को सीधे खारिज कर सकते हैं। अमरीका सरकार की यह नई नीति 11 सितंबर से प्राप्त तमाम आवेदनों पर लागू होगी। यह नीति एच-1बी वीजा के आवेदकों के लिए मुश्किल बन सकती है। गौरतलब है कि अमरीका में रहने वाले ज्यादातर भारतीयों के पास यही वीजा है।
ऐसी परिस्थितियों में सीधे खारिज हो सकते हैं आवेदन
- जरूरी 'प्रारंभिक साक्ष्य' जमा नहीं किए गए।
- वीजा प्राप्त करने की योग्यता साबित नहीं की जा सकी।
...इसलिए मुसीबत है नया नियम
ट्रंप के नए नियम का सीधा-सा मतलब यह है कि अब से एच-1 बी वीजा के आवेदकों को दस्तावेज जमा करने या अपनी योग्यता साबित करना का सिर्फ एक ही मौका मिलेगा। और तो और कुछ मामलों में आवेदन खारिज होने पर लोगों को अमरीका से सीधे बाहर निकाला जा सकता है। जो लोग अभी वहां नौकरी कर रहे हैं उन्हें भी निकाला जा सकता है।
अब तक ये था नियम
यूनाइटेड स्टेट्स सिटिजनशिप ऐंड इमिग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) की नीति में बदलाव से पहले अधिकारियों को आवेदकों को अपना पक्ष रखने के लिए और अधिक साक्ष्य जमा कराने का मौका दिए बिना आवेदन खारिज करने का अधिकार नहीं था। अब तक वीजा आवेदनों की छंटनी करने वाले अमरीकी अधिकारियों को किसी भी तरह का पेच फंसने पर तब तक रिक्वेस्ट फॉर एविडेंसेज (REFs) जारी करना पड़ता था जब तक कि यह संभावना खत्म नहीं हो जाए कि अतिरिक्त दस्तावेज या सूचनाओं से फंसा हुआ पेच सुलझ सकता है।