
Lucknow Building Fire- अनूपपुर जिले के भालूमाड़ा इलाके में एक परिवार की खुशियां उजड़ गई। लखनऊ में हुए अग्निकांड में यहां के युवा बेटे के सभी सपने अधूरे रह गए। 12 लाख के पैकेज वाले इस युवा बेटे के लिए माता-पिता शादी की तैयारी कर रहे थे। अग्निकांड वाले दिन बेटे का फोन नहीं लग रहा था। अंतिम बार दुर्गा पूजा में आया था, उसके बाद परिवार ने नहीं सोचा था कि अब उसका पार्थिक शरीर ही घर आएगा।
लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र स्थित एक निजी संस्थान में हुए भीषण अग्निकांड ने मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के भालूमाड़ा निवासी 26 वर्षीय युवा सॉफ्टवेयर इंजीनियर जयनील चक्रवर्ती का जीवन छीन लिया। अब जयनील के साथ ही उसके परिवार के सपने भी बिखर गए। पूरे क्षेत्र में दुख का माहौल है।
जयनील चक्रवर्ती पिछले तीन वर्षों से लखनऊ में एक निजी कंपनी में गेम सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्य कर रहा था। परिजनों के मुताबिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए वह बेंगलुरु गया था। पढ़ाई के दौरान ही उसकी प्रतिभा के चलते उसे नौकरी का प्रस्ताव मिल गया था। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह करीब 12 लाख रुपए वार्षिक पैकेज पर कंपनी में कार्य करने लगा था। परिवार को उससे बड़ी उम्मीदें थीं और वह अपने क्षेत्र के युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन रहा था।
परिवार से जुड़े लोगों ने बताया कि जयनील पिछले वर्ष दुर्गा पूजा के दौरान अपने घर भालूमाड़ा आया था। इसके बाद नौकरी की व्यस्तता और छुट्टियां नहीं मिलने के कारण वह दोबारा घर नहीं आ सका। फोन और वीडियो कॉल के जरिए ही परिवार से बातचीत होती थी। किसी ने नहीं सोचा था कि घर लौटने की अगली बार वो पार्थिव शरीर के रूप में घर आएगा।
परिजनों के अनुसार हादसे की जानकारी सबसे पहले जयनील के साथ काम करने वाले उसके रूममेट ने दी थी। उसने जयनील के पिता जयंत चक्रवर्ती को फोन कर बताया कि जयनील का मोबाइल लगातार बंद या अनुत्तरित आ रहा है और जिस भवन में वह काम करता है वहां आग लगने की सूचना मिली है।
करीब आधे घंटे बाद रूममेट घटनास्थल के पास पहुंचा, जहां राहत एवं बचाव कार्य जारी था। इसके बाद परिवार की चिंता और बढ़ गई। जयनील के पिता ने भी सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों के जरिए घटना की जानकारी देखी। उस समय उन्हें उम्मीद थी कि उनका बेटा शायद घायल हुआ होगा और सुरक्षित मिल जाएगा।
घटना की जानकारी मिलने के बाद जयनील के माता-पिता, छोटे भाई और अन्य परिजन तत्काल लखनऊ के लिए रवाना हो गए। पूरे रास्ते परिवार को उम्मीद थी कि जयनील जीवित होगा। लेकिन, प्रयागराज पहुंचने पर लखनऊ जिला प्रशासन की ओर से उन्हें सूचना दी गई कि हादसे में जयनील की मौत हो चुकी है। यह सूचना मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
परिवार से जुड़े लोगों ने बताया कि जयनील के विवाह के लिए रिश्ते आने शुरू हो गए थे। परिवार के सभी सदस्य चाहते थे कि अब उसकी शादी कर दी जाए और घर में खुशियां आएं। लेकिन इससे पहले ही यह हादसा हो गया। होनहार बेटे की असमय मौत से माता-पिता गहरे सदमे में हैं।
जयनील के पिता जयंत चक्रवर्ती एसईसीएल जमुना-कोतमा क्षेत्रीय चिकित्सालय में रेडियोग्राफर के पद पर कार्यरत हैं, जबकि माता दुर्गा चक्रवर्ती गृहिणी हैं। छोटा भाई वर्तमान में अध्ययनरत है। लखनऊ अग्निकांड में जयनील की मौत की खबर से भालूमाड़ा सहित पूरे अनूपपुर जिले में शोक की लहर है। स्थानीय लोगों ने इसे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति और परिजनों को दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।