35 साल में पहली बार हुआ ऐसा, केरोसिन डीलरों ने की कलेक्टर से शिकायत
अशोकनगर. जिले में लीड संस्थाओं द्वारा समय पर पेमेन्ट न करने इस महीने 24 किलोलीटर केरोसिन का कोटा लैप्स हो गया है। आगे भी यदि यही स्थिति रही तो अगले महीनों में भी कोटा लैप्स होने की संभावना है। पिछले 35 सालों में पहली बार जिले का कोटा लैप्स हुआ है।यह शिकायत मंगलवार को जिले के चार केरोसिन डीलर्स ने अपर कलेक्टर से की है। उन्होंने बताया कि पिछले तीन सालों में केरोसिन का रेट डबल हो गया है और लागत भी बढ़ गई है।
डीलरों को टैंकर भाड़े और टोल में घाटा लग रहा है। बैंक ओडी का बयाज भी डीलर बैंक को रहे हैं। जबकि डीलरों को दिया जाने वाला पैसा लीड संस्थाएं उपयोग कर रही हैं। लीड संस्थाएं उधार माल लेती है और समय पर पेमेन्ट नहीं देती है। करीब एक से डेढ़ माह लेट पेमेंट दिया जा रहा है।
जबकि केरोसिन टैंकर खाली होने के तत्काल बाद पेमेन्ट की व्यवस्था होनी चाहिए। जिले में केरोसिन के चार डीलर हैं जो लीड संस्थाओं को केरोसिन प्रदाय करते हैं। शासन के आदेशानुसार तीन-चार दिन में पेमेंट डीलरों को होना चाहिए। डीलरों को आयल कंपनी उधार केरोसिन डिपो से नहीं देती है। एडवांस पेमेन्ट करना पड़ता है। डीलरों ने जल्द पेमेंट करवाने, लीड संस्थाओं से लेट पेमेंट का 2 रुपए प्रति सैंकड़ा प्रतिमाह ब्याज दिलाने और लेट पेमेंट किए जाने की जांच करवाने की मांग की है। शिकायत करने वालों में मिटठूलाल हंसराज डीलर अशोकनगर, हरचंद सोहनलाल डीलर मुंगावली, हुकुमचंद सुमेरचन्द डीलर अशोकनगर एवं आकाश आयल एजेंसी डीलर चन्देरी शामिल हैं।
सुविधा होने के बावजूद निजी में जांच के लिए बना दी पर्ची
अशोकनगर जिले में टीकाकरण कराने परिजन अपने तीन दिन के बच्चे को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, तो डॉक्टर ने बच्चे में पीलिया की जांच कराने प्राइवेट लैब जाने की पर्ची बना दी। परिजनों ने सिविल सर्जन से शिकायत की तो सिविल सर्जन ने कहा ऐसी किसी जांच की जरूरत नहीं है और टीका लगवाने के लिए कहा।
दुर्गा कॉलोनी निवासी दिलीप शर्मा व उनकी पत्नी प्रियंका शर्मा अपने जुड़वा बच्चों को टीका लगवाने मंगलवार को जिला अस्पताल लेकर गए थे। बच्चों को देखकर उन्हें पीलिया जैसे लक्षण दिखे तो वह एसएनसीयू में डॉ. आरके अरोरा के पास पहुंचे।
जहां डॉ.अरोरा ने उन्हें पीलिया की जांच कराने प्राइवेट पैथोलॉजी जाने के लिए पर्ची बना दी। जबकि इन जांचों की सभी व्यवस्थाएं जिला अस्पताल में भी हैं। सिविल सर्जन डॉ. हिमांशु शर्मा भी बाल रोग विशेषज्ञ हैं, जब परिजन प्राईवेट लैब पर भेजने की शिकायत करने पहुंचे तो सिविल सर्जन ने बच्चे को चैकअप किया और कहा कि जांच की जरूरत नहीं, सिर्फ टीकाकरण कराओ।