अशोकनगर

अनुमति का पेंच: 70 करोड़ रु.की 44 किमी सड़क,साढ़े तीन किमी में वनभूमि तो वर्षो से सड़क अधूरी

- 75.65 करोड़ रु.की 4 सड़कों में वन विभाग का अडंगा, नहीं हो पा रहे निर्माण।

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Feb 01, 2023
delay in road construction


अशोकनगर. 75.65 करोड़ रुपए की चार सड़कों के निर्माण में वनभूमि बाधा बन गई है, निर्माण की अनुमति न मिल पाने से इन सड़कों का निर्माण नहीं हो पा रहा है। इससे वर्षों से स्वीकृत पड़ी इन सड़कों का लोगों का लाभ नहीं मिल पा रहा है और आवाजाही में लोग ऊबडख़ाबड़ रास्तों जोखिम भरे रास्तों से निकलने के लिए मजबूर हैं।
वर्ष 2016 में अशोकनगर-पिपरई-मतावली तक 70 करोड़ रुपए लागत की 44 किमी लंबी सड़क स्वीकृत हुई। जिसका नेशनल हाइवे से मतावली तक की 6 किमी सड़क प्रधानमंत्री सड़क योजना में बन गई, तो इस राशि से पीडब्ल्यूडी ने अशोकनगर शहर में वायपास पर फोरलेन सीसी रोड बना दी। वहीं अशोकनगर-पिपरई 22 किमी 7 मीटर चौंड़ी सीसी सड़क बन गई। पिपरई से तमाशा व काछीबरखेड़ा होते हुए नेशनल हाइवे तक साढ़े पांच मीटर चौंडी सीसी सड़क बनना थी, लेकिन तमाशा-जारोली के बीच साढ़े तीन किमी हिस्से में वनभूमि है, पहले तो वन विभाग ने दोनों तरफ डेढ़-डेढ़ मीटर की अनुमति दे दी, लेकिन 23 जनवरी को यह कहते हुए अनुमति निरस्त कर दी कि इस हिस्से में पुरानी जर्जर सड़क पर भी निर्माण की अनुमति लेना होगी। इससे इस हिस्से में सड़क निर्माण नहीं हो पा रहा है, जबकि यह रास्ता मुख्य ढ़लान का है, इससे आवाजाही में दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
दो सड़कों के निर्माण के एवज में देना होंगे 10-10 लाख-
एक करोड़ रु.लागत की ढ़ाई किमी बरखाना-मर्दनखेड़ी रोड व 65 लाख रु.लागत की 1.4 किमी बरखेड़ाडांग-तिंसी सड़क के निर्माण में भी वनभूमि आ रही है। पीडब्ल्यूडी ने ऑनलाइन आवेदन कर निर्माण की अनुमति मांगी तो वन विभाग ने दोनों सड़कों के निर्माण के एवज में 10-10 लाख रु.जमा कराने के लिए कहा है। इससे पीडब्ल्यूडी को 10-10 लाख रु.वनविभाग में जमा कराना होंगे, तब इन दोनों सड़कों का निर्माण हो सकेगा। वहीं चार करोड़ रु.लागत की पांच किमी कुरवासा-हलनपुर रोड के निर्माण में भी 3 किमी वनभूमि है, इससे यहां भी वन विभाग से अनुमति लेना होगी। यह तीनों सड़कें वर्ष 2019 से स्वीकृत पड़ी हैं।
जर्जर पड़ीं जिले की दो मुख्य सड़कें जिनकी मरम्मत का है लोगों को इंतजार-
1. मरम्मत को 24 करोड़ रु.स्वीकृत, अब तक काम शुरू नहीं-
मप्र सड़क विकास प्राधिकरण की गुना-अशोकनगर-ईसागढ़ रोड निर्माण के कुछ समय बाद ही जर्जर होकर गड्ढ़ों में तब्दील हो गई थी। जिसमें अशोकनगर से ईसागढ़ तक सड़क पूरी तरह जर्जर हो चुकी है, फिर भी वाहन चालकों को टोल टैक्स चुकाने के बाद ही इस जर्जर सड़क से निकलना पड़ता है। इस सड़क के मरम्मत के लिए 24 करोड़ रुपए स्वीकृत हो चुके हैं, साथ ही टेंडर भी हो गया, लेकिन अब तक मरम्मत कार्य शुरू नहीं हुआ।
2. गड्ढ़ों में तब्दील नेशनल हाइवे, फिर भी मरम्मत नहीं ध्यान-
नेशनल हाइवे क्रमांक 346ए पूरी तरह से जर्जर हो चुका है और स्थिति यह है कि मुंगावली से गदूली तक 7 किमी हिस्से में सड़क पूरी तरह से गड्ढ़ों में तब्दील है, इससे यहां से सड़क पर दुर्घटनाएं बढ़ गई है। नेशनल हाइवे के निर्माण का टेंडर हो चुका है, इससे विभाग यहां पर गड्ढ़ों को भरवाने पर भी रुचि नहीं दिखा रहा है। नतीजतन नेशनल हाइवे से निकलने में वाहन चालकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वर्जन-
वनविभाग ने तमाशा से जारोली तक की अनुमति निरस्त कर दी, अब निर्माण के लिए ऑनलाइन आवेदन कर वनविभाग से अनुमति लेंगे। वहीं दो सड़कों के निर्माण में 10-10 लाख रुपए वनविभाग में जमा करना है, तब दो सड़कों का निर्माण हो सकेगा। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है।
दिलीप बिगोनिया, ईई पीडब्ल्यूडी अशोकनगर

Published on:
01 Feb 2023 05:51 pm
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