ऑनलाइन प्रक्रिया बनी परेशानी, जब खाद्यान्न नहीं मिलेगा तो बच्चों में कैसे होगा कुपोषण दूर
मुंगावली। शासन बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए भले कितनी योजनाएं चला रही हो, लेकिन विभाग की लापरवाही एवं गलती के कारण है, यह धरातल पर नहीं आ पा रही है। ऐसा ही मामला क्षेत्र की आंंगनबाड़ी केन्द्रों पर देखने को मिला। आंगनबाड़ी केन्द्रों पर भोजन वितरण करने वाले समूहों को 6 माह से खाद्यान्न नहीं मिला और खाद्यान्न के लिए स्व सहायता समूह के संचालक कभी राशन की दुकान तो कभी महिला बाल विकास के चक्कर लगा रहे हैं। उसका कारण है विभाग द्वारा समूह को खाद्यान्न वितरण का ऑनलाइन किया जाना, इसमें भारी हेराफेरी सामने आई है।
उल्लेखनीय है कि आंगनबाड़ी केंद्रों पर भोजन वितरण करने वाले बच्चों को राशन की दुकान से ३-३ माह का खाद्यान्न प्राप्त होता था और उसके लिए बच्चों के अनुसार रिलीज़ आर्डर महिला बाल विकास द्वारा दिया जाता था। किंतु जनवरी से समूह को दिए जाने वाले खाद्यान्न को ऑनलाइन कर दिया गया है। इसमें भारी गड़बड़ी उजागर हुई है। इसके कारण कई स्व सहायता समूह को जनवरी माह से खाद्यान्न आज तक उपलब्ध नहीं हो सका। इससे आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को भोजन का वितरण नहीं हो पा रहा है।
आनलाइन सूची में कई गड़बडिय़ां
जानकारी अनुसार महिला बाल विकास द्वारा समूह को खाद्यान्न के लिए जो राशन की दुकानों की सूची ऑनलाइन की गई है। उसमें कई आंगनबाड़ी केंद्रों को खाद्यान्न देने वाली राशन की दुकान का नाम तक नहीं है। जैसे कस्बा रेंज के तीनों आंगनबाड़ी केंद्र, लोहारी का आंगनबाड़ी केंद्र। इसके अलावा करीब एक सैकड़ा स्व सहायता समूहों को ऑनलाइन फंडिंग के अनुसार 10 से 25 किलोमीटर दूर तक खाद्यान्न लेने के लिए जाना पड़ेगा।
जैसे ग्राम बरवाह, भारतपुरा को अशोकनगर के श्यामा प्रसाद मुखर्जी उपभोक्ता भंडार से खाद्यान्न मिलेगा। वहीं अन्य समूहों को भी 15 से 25 किलोमीटर की दूरी पर खाद्यान्न लेने जाना पड़ेगा। जो ग्राम आक्सी को दम दमा की दुकान से जोड़ा गया है। अमनचार को पीपलखेड़ा, भेसोनकला को ओंडेर, कर्राटाका को जारोली जैसे कई और गांव हैं जिनको लंबी दूरी से राशन लाना पड़ेगा। अब ऐसे में समूह संचालक इतनी दूरी से राशन लाएंगे तो उस पर होने वाले परिवहन खर्च का भुगतान कहां से होगा।
रिलीज ऑर्डर के लिए लगा रहे चक्कर
पहले तो महिला बाल विकास विभाग की गलती से खाद्यान्न मिलने वाली राशन की दुकानों की दूरी बढ़ा दी गई है। उसके बावजूद भी समूह संचालक रिलीज आर्डर लेने महिला बाल विकास विभाग जाते हैं, तो कई समूह संचालकों को जनवरी से अभी तक रिलीज आर्डर नहीं मिल पाए हैं। प्रतिदिन विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।