MP News: करीब 50 मन्नत पत्र दानपेटियों से निकले। टूटी-फूटी लिखावट और व्याकरण की अशुद्धियों से भरी ये पर्चियां सरकारी दफ्तरों में भले ही खारिज हो जाएं, लेकिन करीला के इस दरबार में इन्हें 'वीआइपी एंट्री' मिलती है।
karila Dham: जब दुनिया के तमाम दरवाजे बंद हो जाते हैं, तब इंसान एक ऐसे द्वार की ओर उम्मीद भरी निगाहों से देखता है, जहां सुनवाई के लिए न किसी सिफारिश की जरूरत होती है और न ही वकीलों की दलीलों की। अशोकनगर स्थित ऐतिहासिक करीला धाम(karila Dham) में मां जानकी के दरबार में भक्तों का यही अटूट विश्वास एक अनूठे रूप में सामने आया है। यहां भक्त सिर्फ सिर झुकाकर प्रार्थना नहीं करते, बल्कि अपनी पूरी जिंदगी का कच्चा-चिट्ठा, पारिवारिक उलझनें, व्यापारिक मंदी और दबी हुई ख्वाहिशें कागज के टुकड़ों पर लिखकर मां के चरणों में समर्पित कर देते हैं।
सोमवार को करीब 50 मन्नत पत्र दानपेटियों से निकले। टूटी-फूटी लिखावट और व्याकरण की अशुद्धियों से भरी ये पर्चियां सरकारी दफ्तरों में भले ही खारिज हो जाएं, लेकिन करीला के इस दरबार में इन्हें 'वीआइपी एंट्री' मिलती है। प्रशासन और करीला ट्रस्ट ने इन पत्रों को एक साथ बांधकर, पान-बताशा अर्पित कर माता के चरणों में रखा है।
इन पत्रों को पढ़ना किसी दस्तावेज को पढ़ने जैसा नहीं, बल्कि एक रूहानी अनुभव है। भक्तों की अर्जियों में किसी तरह का छल-कपट नहीं है, बल्कि यह वह निश्छल विश्वास है जो आज के दौर में दुर्लभ है। मां जानकी को लिखे गए पत्रों के कुछ अंश ऐसे हैं:
एक पर्ची में भक्त ने ईश्वर से सीधे संवाद किया है। उसने अपने और भाई के लिए नौकरी, जज बनने का लक्ष्य और साथ ही 5 किलो सोना व 5 किलो चांदी की मांग की है।
एक बहन ने पारिवारिक कलह से तंग आकर माता के सामने अपनी व्यथा रखी है। उसने गुहार लगाई है कि उसके जीजाजी का स्वभाव बदल जाए और वे दीदी के साथ सम्मानजनक व्यवहार करें। बदले में उसने मन्नत पूरी होने पर एक 'राई' नृत्य कराने का वचन दिया है।
व्यापारिक मंदी से जूझ रहे एक परिवार ने तो अपनी पूरी बैलेंस शीट ही मां के सामने खोल दी है। पत्र में लिखा है कि पंकज के कपड़े का धंधा बिल्कुल नहीं चल रहा है, पुराना स्टॉक आप ही को निकलवाना है। इसी के साथ, अनजाने में हुई भूलों के लिए पूरे परिवार की ओर से माफी भी मांगी गई है।
एक अन्य पत्र में भक्त ने अपनी समस्याओं की पूरी सूची ही सौंप दी है। कर्ज से मुक्ति, सरकारी नौकरी, घर की बिक्री, नई दुकान और मुस्कान नामक बाधा से छुटकारे की मांग की है।
करीला(karila Dham) में मिली अन्य अर्जियों में बेटी के मंगल दोष दूर करने से लेकर कोर्ट-कचहरी के पुराने मुकदमों से मुक्ति तक की गुहार शामिल है। किसी ने संविदा की नौकरी को परमानेंट कराने का संकल्प लिया है, तो किसी ने अपनी जमीन के सीमा विवाद को सुलझाने की प्रार्थना। ये पत्र महज कागज नहीं, बल्कि लोगों का वह अंतिम भरोसा हैं, जिसे वे संसार के उस सबसे बड़े कोर्ट में लेकर आए हैं, जहां न्याय और कृपा का पैमाना मानवीय तर्कों से कहीं ऊपर है।