
driver son cracked the UPSC exam on his 21st attempt in mp (फोटो- Patrika.com)
UPSC Result: कहते हैं अगर हौसलों की उड़ान सच्ची हो, तो आसमान भी छोटा पड़ जाता है। सुविधाओं के अभाव और लगातार मिल रही असफलताओं के बावजूद, जब कोई युवा अपनी जिद पर अड़ जाए, तो वह इतिहास रच देता है। अशोकनगर जिले के चंदेरी और मुंगावली के युवाओं ने कुछ ऐसी ही प्रेरणादायक इबारत लिखी है।
एक ओर जहां चंदेरी के एक ड्राइवर के बेटे ने 20 बार असफल होने के बाद यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा पास कर आईपीएस का पद हासिल किया है, तो वहीं मुंगावली के एक छोटे से गांव की दो चचेरी बहनों ने नौकरी के साथ खुद से पढ़ाई कर एमपीपीएससी में परचम लहराया है। यह सफलता केवल इन युवाओं की नहीं, बल्कि उनके माता-पिता के उस पसीने की भी जीत है, जो उन्होंने अपने बच्चों के सपनों को सींचने में बहाया है। (MP News)
चंदेरी के 25 वर्षीय विवेक यादव की कहानी किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। विवेक के पिता नवलसिंह यादव चंदेरी नगर पालिका में ड्राइवर हैं और उनकी मां घर पर सिलाई मशीन चलाकर परिवार का भरण-पोषण करती आई हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद इस परिवार ने विवेक के सपनों में कभी कटौती नहीं की।
सफलता विवेक को रातों-रात नहीं मिली। उन्होंने अपने जीवन में 20 अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में असफलता का कड़वा घूंट पिया, लेकिन न तो वे टूटे और न ही उनके हौसले पस्त हुए। हर हार से उन्होंने एक नई सीख ली और अपनी कमियों को सुधार कर दोगुनी ताकत से उठे। उनकी इसी जिद का नतीजा था कि पिछले साल उन्होंने यूपीएससी क्रैक कर असिस्टेंट कमिश्नर रेलवे का पद हासिल किया।
लखनऊ में ट्रेनिंग के दौरान भी उनका आईपीएस बनने का सपना उन्हें सोने नहीं दे रहा था। उन्होंने यूपीएससी में अपना 5वां प्रयास दिया और इस बार 487वीं रैंक के साथ सीधे आईपीएस अधिकारी बनकर अपने माता-पिता के संघर्षों का सबसे खूबसूरत सिला दिया। आज सिलाई कर घर चलाने वाली मां और ड्राइवर पिता की आंखों में गर्व और खुशी के आंसू छलक रहे हैं।
अशोकनगर के 23 वर्षीय चितवन जैन ने यूपीएससी में ऑल इंडिया 17वीं रैंक हासिल कर साबित कर दिया है कि सफलता के लिए अति नहीं, बल्कि निरंतरता जरूरी है। शहर के व्यापारी मनीष जैन के बेटे चितवन ने बचपन में ही कलेक्टर बनने का जो ख्वाब बुना था, उसे उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में हकीकत में बदल दिया। तारासदन स्कूल से 10वीं के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीकॉम करने वाले चितवन ने दिल्ली स्थित सामाजिक-शैक्षणिक संस्था जीतो में रहकर तैयारी की।
उनका पहला प्रयास बिना तैयारी के था, लेकिन अगले दो साल उन्होंने अपनी रणनीति को पैना किया। चितवन की सफलता का मूल मंत्र बेहद सरल रहा, सामान्य ढंग से पढ़ाई और खुद के बनाए सटीक नोट्स। उनका हर युवा के लिए एक ही संदेश है कि तैयारी बीच में न छोड़ें, सफलता एक दिन जरूर मिलेगी। उनकी यह सोच उन युवाओं के लिए अचूक मार्गदर्शन है, जो परीक्षा के दबाव में अक्सर हार मान लेते हैं।
दूसरी ओर, मुंगावली के ढुड़ैर गांव ने भी शिक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। यहां की दो चचेरी बहनों, उर्मिला यादव पुत्री गुलाबसिंह यादव और रजनी यादव पुत्री जगदीश यादव ने एक साथ एमपी पीएससी-2022 की परीक्षा पास कर उच्च शिक्षा विभाग में ग्रंथपाल का पद हासिल किया है। इन बहनों का सफर भी आसान नहीं था। किसान पिता की बेटी उर्मिला और शासकीय शिक्षक पिता की बेटी रजनी ने नवोदय विद्यालय से अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी की। इसके बाद दोनों ने इंदौर से बी-लिब और एम-लिब की डिग्री हासिल की।
परिवार पर आर्थिक बोझ न पड़े, इसलिए दोनों बहनों ने नवोदय विद्यालय में गेस्ट फैकल्टी के रूप में नौकरी करना शुरू कर दिया। उर्मिला दिल्ली में तो रजनी उत्तराखंड में सेवाएं दे रही थीं। नौकरी की थकान के बावजूद दोनों बहनों ने कोचिंग का सहारा लेने के बजाय सेल्फ-स्टडी का कठिन रास्ता चुना। उनकी इसी तपस्या का परिणाम 5 मार्च को सामने आया, जब उर्मिला ने पूरे प्रदेश में 30वीं और रजनी ने 119वीं रैंक हासिल कर अपने परिवार और गांव का नाम रोशन कर दिया। वर्तमान में उर्मिला गुना की तात्या टोपे यूनिवर्सिटी में गेस्ट फैकल्टी के पद पर कार्यरत हैं, जबकि रजनी लखनऊ से अपनी पीएचडी पूरी कर रही हैं।
चितवन, विवेक, उर्मिला और रजनी की यह सफलता आज के उन युवाओं के लिए एक बड़ा सबक है, जो सीमित संसाधनों या एकाध असफलता के बाद निराश होकर हार मान लेते हैं। इन चारों ने साबित कर दिया है कि अगर आपके इरादे फौलादी हैं, तो परिस्थितियां कभी आपकी मंजिल का रास्ता नहीं रोक सकतीं। (MP News)
Published on:
07 Mar 2026 02:22 pm
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