अशोकनगर

एनजीटी ने लगाई कलेक्टर और कमिश्नर को जमकर फटकार, वेटलैंड पर तान दी 52 दुकानें

MP News: सरोवर में अवैध निर्माण और डी-नोटिफाई की कोशिश पर NGT ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर, कमिश्नर और इंजीनियर को तलब कर प्रशासन की निष्क्रियता पर तीखी फटकार लगाई।

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Feb 11, 2026
ngt slams ashoknagar's Collector and Commissioner (Patrika.com)

MP News: अशोकनगर शहर की पहचान माने जाने वाले तुलसी सरोवर में निर्माण के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने 9 फरवरी 2026 को हुई सुनवाई में अशोकनगर जिला प्रशासन और मप्र वेटलैंड अथॉरिटी को जमकर फटकार लगाई है। ट्रिब्यूनल ने इस मामले को प्रशासन की निष्क्रियता का आंखें खोलने वाला उदाहरण बताया है। अशोकनगर के कलेक्टर, म्युनिसिपल कमिश्नर और जल संसाधन विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को आज 12 फरवरी को जवाब देने के लिए तलब किया है।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का खुलेआम उल्लंघन

याचिकाकर्ता मैनाक भट्टाचार्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए ट्रिब्यूनल ने पाया कि पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए वेटलैंड का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया गया है। जिसमें कई निर्माण कर दिए गए और इसके बावजूद भी जिला प्रशासन इसे बचाने के बजाय डी-नोटिफाई (संरक्षित सूची से बाहर) करने की प्रक्रिया में लगा हुआ था।

ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में लिखा है कि प्रशासन का यह कदम सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और पर्यावरण नियमों का खुला उल्लंघन है। एनजीटी ने हैरानी जताई कि कैसे स्थानीय प्रशासन सुप्रीम कोर्ट और वेटलैंड अथॉरिटी के आदेशों को अपने प्रशासनिक आदेशों से शून्य करने की कोशिश कर रहे थे।

अधिकारी कर रहे थे डी-नोटिफाई करने की साजिश

एनजीटी के आदेश में सबसे हैरान करने वाला खुलासा यह है कि तुलसी सरोवर एक नोटिफाइड वेटलैंड है, जिसका क्षेत्रफल 20.785 हेक्टेयर है। इसे सुप्रीम कोर्ट और इसरो के नक्शे में भी मान्यता प्राप्त है। जस्टिस शिवकुमार सिंह और एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी की बेंच ने आदेश दिया है कि कलेक्टर और वेटलैंड अथॉरिटी तुरंत प्रभाव से तुलसी सरोवर की 'जमीनी सत्यापन करें और सीमा का निर्धारण करें।

मौके पर हुए निर्माणों की यह सूची

  • तालाब को मिट्टी और मुरम से भरकर एक टापू बना दिया गया और वहां तक जाने के लिए सड़क भी बना दी गई।
  • वेटलैंड की जमीन को भरकर वहां 52 दुकानों का कॉम्प्लेक्स खड़ा कर दिया गया। डूब क्षेत्र में पब्लिक टॉयलेट तक बना दिए।
  • पानी के प्राकृतिक बहाव को रोकने के लिए 2017 के बाद तालाब के बेड पर एक लंबी कंक्रीट की दीवार खड़ी कर दी गई।
  • शहर का बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज सीधे सरोवर में छोड़ा जा रहा है। (MP News)

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Updated on:
11 Feb 2026 11:30 pm
Published on:
11 Feb 2026 11:28 pm
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