मालदीव के पूर्व उपराष्‍ट्रपति ने भारत से अपील की है कि वो मालदीव में लोकतंत्र बहाली के लिए अंतरराष्‍ट्रीय प्रयासों की अगुवाई करे।
नई दिल्ली. मालदीव के पूर्व उपराष्ट्रपति मोहम्मद जमील अहमद ने आपातकाल की बढ़ती अवधि को देखते हुए भारत से मालदीव में लोकतंत्र की स्थापना के लिए सार्थक प्रयास करने की अपील की है। उन्होंने भारत सरकार से अपील की है कि वो अंतराष्ट्रीय मुहिम की अगुवाई करे।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय करे मदद
जमील अहमद ने अपने देश में बढ़ते राजनीतिक अशांति को लेकर चिंता जताई और अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में मेरी राय है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को मदद के लिए आना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत लीगल मेकेनिज्म का इस्तेमाल इस काम के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मालदीव में हालात सुधरने के आसान बहुत कम है। क्योंकि देश में आपातकाल की अवधि को बढ़ा दिया गया है।
संसदीय समिति यामीन से सहमत
मालदीव के एक प्रमुख संसदीय समिति ने राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के आपातकाल को बढ़ाने की अपील को स्वीकार कर लिया है। आपातकाल को 30 दिनों के लिए बढ़ाया गया है। इस पर भारत ने निराशा व्यक्त की है। जमील ने कहा कि आपातकाल के विस्तार के लिए मालदीव संविधान के अनुच्छेद 255 के लिए आवश्यक है कि एक उचित मंच होना चाहिए, जिसके लिए संसद के 43 सदस्यों की ताकत की आवश्यकता होती है। उतने नंबर नहीं होने पर सरकार ने संसद के 36 सदस्यों के साथ जाने का फैसला किया।
संवैधानिक अधिकार निलंबित
यामीन ने आपातकालीन स्थिति के तहत संवैधानिक अधिकारों को निलंबित कर रखा है। वहां पर आपातकाल का ऐलान करने के बाद से राजनेताओं की धरपकड़ तेज हो गई थी। इस के तुरंत बाद पूर्व राष्ट्रपति मोमून अब्दुल गयूम को गिरफ्तार कर लिया गया था। वो मौजूदा राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को पद से हटाए जाने के लिए अभियान चला रहे थे। देश के चीफ जस्टिस अब्दुल्ला सईद और सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य जज को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।