सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई में नवाज शरीफ को बेइमानी के मामले में अयोग्य करार दिया था।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधान मंत्री नवाज शरीफ ने पनामा मामले में अपने फैसले की समीक्षा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में तीन अलग-अलग अपील दायर की हैं। शरीफ के वकील ख्वाजा हैरिस ने इमरान खान, शेख राशिद और सिरजुल हक की याचिकाओं के जवाब में शीर्ष अदालत की लाहौर रजिस्ट्री में तीन समीक्षा याचिकाएं दाखिल कीं। 34 पेज के आवेदन में शरीफ ने अदालत से अपने फैसले की समीक्षा करने का अनुरोध किया। साथ ही उन्होंने समीक्षा याचिकाओं का निर्णय लेने तक मूल फैसले को निलंबित करने के निर्देश देने की भी मांग की। शरीफ के द्वारा दायर की गई याचिका में यह भी तर्क किदया गया कि शीर्ष अदालत होने के नाते सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले ने उन्हें अपील करने का अधिकार वंचित कर दिया था, जो हर नागरिक का अधिकार था।
कोर्ट ने करार दिया था आयोग्य
विदित हो कि जुलाई महीने पांच सदस्यीय सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने शरीफ को बेईमानी के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में अहम फैसला सुनाया था कि पनामा पेपर के घोटाले में उनके और उनके बच्चों के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले दर्ज किए गए हैं। नतीजतन शरीफ को प्रधान मंत्री को पद छोड़ना पड़ा।
जजों के अपमान मामले में नोटिस
पाकिस्तान की एक अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों का अपमान करने के मामले में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज के 13 अन्य वरिष्ठ नेताओं को नोटिस जारी किये हैं। लाहौर उच्च न्यायालय में शरीफ के खिलाफ याचिका दाखिल कर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने पिछले सप्ताह इस्लामाबाद से लाहौर तक अपनी चार दिन की होमकमिंग रैली में सुप्रीम कोर्ट के पांच न्यायाधीशों पर मौखिक हमला बोला था, जिन्होंने पनामा पेपर्स मामले में उन्हें अयोग्य करार दिया था। याचिका में कहा गया, ‘शरीफ और उनके खास लोगों ने इस्लामाबाद से लाहौर के रास्ते में कई जगहों पर न्यायपालिका विरोधी भाषण दिये और शीर्ष अदालत के जजों का मजाक उड़ाया।