नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली इस सप्ताह अपनी भारत यात्रा के दौरान करोड़ों रुपये के भारत में बंद हो चुके पुराने नोटों को बदलने की मांग करेंगे.
नई दिल्ली। पाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली इस सप्ताह अपनी भारत यात्रा के दौरान वहां पड़े करोड़ों रुपये के भारत में बंद हो चुके पुराने नोटों (करेंसी) को बदलने के लिए देश से मांग करेंगे. उनकी इस मांग की वजह दोनों देशों के बीच संबंधों को और ज्यादा मजबूत करना है.
हालांकि अभी नेपाल और भारत को इस बारे में सहमति बनानी है कि कैसे बंद हो चुकी इस पुरानी करेंसी को नई में बदला जाए. नेेपाल के पास तकरीबन 950 करोड़ रुपये के बंद हो चुके भारतीय नोट हैं जो वहां के नागरिकों और असंगठित क्षेत्रों के पास पड़े थे. नवंबर 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई 500 और 1,000 रुपये के नोटों के प्रचलन पर पाबंदी (नोटबंदी) की घोषणा के बाद यह करेंसी प्रचलन से बाहर कर दी गई थी.
पीएम मोदी द्वारा की गई नोटबंदी की घोषणा का मकसद अघोषित संपत्ति को बाहर करने के साथ ही आतंकियों के जाली नोटों के इस्तेमाल को रोकना था. लेकिन नोटबंदी के इस कदम की चपेट में नेपाल और भूटान जैसे देश भी आ गए जहां पर व्यापक रूप से भारतीय करेंसी का इस्तेमाल किया जाता है.
नोटबंदी से नेपाल को हुआ नुकसान
मंगलवार को नेपाल की संसद में पीएम ओली ने कहा, "भारतीय नोटबंदी से नेपाल के नागरिकों को नुकसान हुआ है. मैं भारतीय नेताओं के साथ अपनी बैठक में यह मुद्दा उठाउंगा और इस मामले को निपटाने की दरख्वास्त करूंगा."
भारत, नेपाल का सबसे बड़ा व्यापारिक सहयोगी है और रोजमर्रा की वस्तुओं का सबसे बड़ा सप्लायर है. नेपाल के लोग और उद्योग भारतीय मुद्रा का व्यापक इस्तेमाल करते हैं और यह अपने घरों में भारतीय मुद्रा के रूप में सेविंग्स भी करते हैं.
शुक्रवार से शुरू हो रही नेपाल के पीएम ओली की भारत यात्रा के दौरान वे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद , पीएम मोदी और अन्य नेताओं से मुलाकात करेंगे.
आरबीआई ने दी थी नोट बदलने की मौखिक सहमति
केंद्रीय नेपाल राष्ट्र बैंक (एनआरबी) के अधिकारी कहते हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पिछले साल मार्च में हुई एक बैठक में नेपाली नागरिकों को 4,500 रुपये प्रति व्यक्ति तक पुरानी मुद्रा को नई में बदलने की मौखिक अनुमित दी थी. हालांकि अब तक उन्हें इस बारे में कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई.
वहीं, इस मामले में आरबीआई के दृष्टिकोण की सीधी जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि केंद्रीय बैंक नेपाल ही क्या किसी अन्य देश की भी पुरानी मुद्रा को बदलने के लिए अक्षम है, क्योंकि नोटबंदी के दौरान सरकार द्वारा जारी किए गए दिशानिर्देश में इस तरह का कोई नियम नहीं हैै. इस संबंध में केवल सरकार ही कोई निर्णय ले सकती है.