Highlight अब तक देश में 184 मामले सामने आए हैं जो लगातार बढ़ रहे हैं। सिंध प्रांत तो कोरोना का गढ़ माना जा रहा है। संक्रमण से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं।
इस्लामाबाद। कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर पाकिस्तान भी बदतर स्थिति का सामना कर रहा है। यहां पर कोरोना वायरस से पॉजिटिव लोगों की संख्या बढ़कर 184 हो गई है। भारत समेत दक्षिण एशिया में यह सबसे ज्यादा है। इससे बचने के लिए पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी मदद की गुहार लेकर चीन पहुंच गए हैं। गौरतलब है कि पाकिस्तान में कोरोना से निपटने के लिए प्राप्त मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। अगर यहां पर मरीजों की संख्या बढ़ती तो है तो यह संक्रमण देश तेजी से फैल सकता है।
पाकिस्तान के पीएम इमरान खान के तमाम दावों के विपरीत, यहां पर हालात लगातार खराब हो रहे हैं। सिंध प्रांत तो कोरोना का गढ़ माना जा रहा है। यहां पर सबसे ज्यादा 150 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा खैबर पख्तूनख्वा में 15, बलूचिस्तान में 10, पंजाब में 2, राजधानी इस्लामाबाद में 2, गिलगिट बाल्टिस्तान में 5 मामले सामने आए हैं। पाकिस्तान में कोरोना पॉजिटिव लोगों की बीते 24 घंटे में संख्या तीन गुना हो गई है।
चीन में विमान नहीं भेजा था
चीन के वुहान शहर में कोरोना के फैलने के बाद से ही यह महामारी अन्य देशों तक पहुंची थी। चीन की सीमा से चिपका पाकिस्तान इससे कुछ दिनों तक बचा रहा। उसने चीन में फंसे अपने नागरिकों को इस डर से नहीं निकाला कि कहीं पाकिस्तान में संक्रमण ज्यादा न फैल जाए। पाकिस्तानी कई छात्रों ने इमरान सरकार से गुहार लगाई थी कि वह उन्हें वुहान शहर से बाहर निकालें। मगर चीन ने विमान को नहीं भेजा।
चीन की पहली यात्रा
पाकिस्तान में कोरोना ने हालात और ज्यादा खराब कर दिए हैं। इस दोहरे संकट से जूझ रहे इमरान खान ने राष्ट्रपति आरिफ अल्वी को चीन से मदद मांगने भेजा है। चीन के वुहान शहर में कोरोना वायरस का प्राकोप होने के बावजूद अल्वी ने ये दौरा रखा। यही नहीं राष्ट्रपति अल्वी की भी यह पहली चीन यात्रा है।
एक रिपार्ट के अनुसार, पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पीआईएमएस) में बचाव के बुनियादी संसाधन तक उपलब्ध नहीं हैं, जिस वजह से यहां डॉक्टर भी सुरक्षित नहीं हैं। रविवार को कोरोना संक्रमण से ग्रसित व्यक्ति को वेंटिलेटर पर लेकर जाने वाले दो डॉक्टरों को ही एकांतवास में रखना पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार डॉक्टरों की सुरक्षा के साथ समझौता किया जा रहा है। यहां पर 800 मेडिकल स्टाफ के लिए पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंट (पीपीई) भी पर्याप्त मात्रा में नहीं है।