
Brahmaputra river
भारत (India) और चीन (China) के संबंधों में अक्सर ही उतार-चढ़ाव देखा जाता है। हालांकि चीन कुछ न कुछ ऐसा करने से बाज नहीं आता जिससे भारत को परेशानी हो। पिछले साल चीन ने ऐसे ही एक और प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। हम बात कर रहे हैं ब्रह्मपुत्र नदी (Brahmaputra River) पर बांध बनाने की, जो चीन का महत्वकांक्षी प्रोजेक्ट है। तिब्बत से आने वाली इस नदी पर चीन दुनिया का सबसे बड़ा जलविद्युत बांध बना रहा है।
चीन का नया बांध तीन गॉर्जेस बांध (Three Gorges Dam) से भी बड़ा होगा। गौरतलब है कि यह चीन की यांगत्ज़ी नदी पर बना एक जलविद्युत बांध है, जिसने धरती के घूमने की गति को भी धीमा कर दिया था। नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार इस बांध की वजह से धरती की घूर्णन गति 0.06 माइक्रोसेकंड प्रतिदिन धीमी हो गई थी। चीन का नया बांध तीन गॉर्जेस बांधसे भी ज़्यादा प्रभाव डालेगा क्योंकि इसका आकार और जल भंडारण क्षमता कई गुना ज़्यादा होगी।
चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग (Li Qiang) ने इसे “सदी का प्रोजेक्ट” बताया है। यह चीन को 2030 तक कार्बन उत्सर्जन कम करने और 2060 तक नेट-ज़ीरो लक्ष्य हासिल करने में मदद करेगा।
चीन की सरकारी मीडिया ने बताया कि यह इस बांध की लागत लगभग 1.2 ट्रिलियन युआन होगी और इससे प्रति वर्ष लगभग 300 बिलियन किलोवॉट घंटे बिजली का उत्पादन हो सकेगा, जो दुनिया की सबसे ज़्यादा बिजली उत्पादन क्षमता वाली जलविद्युत परियोजना होगी।
एक रिपोर्ट के अनुसार यह बांध नदी के ऐसे मोड़ पर है, जहाँ काफी खड़ी ढलान है। यह इस परियोजना की मुख्य विशेषता है। इस प्राकृतिक ढलान का इस्तेमाल उठाकर इंजीनियर एक दीवार वाले बांध की ज़रूरत के बिना भारी मात्रा में बिजली उत्पन्न कर सकते हैं। इसका निर्माण तीन चरणों में होगा। हालांकि समयसीमा अभी तक घोषित नहीं की गई है।
◙ जल प्रवाह पर नियंत्रण और जल संकट
चीन इस बांध के ज़रिए ब्रह्मपुत्र नदी के जल प्रवाह को नियंत्रित कर सकता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि चीन, नदी के पानी को रोककर भारत के अरुणाचल प्रदेश, असम और मिजोरम में कृषि, सिंचाई और पेयजल की आपूर्ति को प्रभावित कर सकता है। ब्रह्मपुत्र नदी पूर्वोत्तर भारत में खेती और पेयजल का प्रमुख स्रोत है। ऐसे में जल प्रवाह में कमी से इन क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था और आजीविका पर बुरा असर पड़ सकता है।
◙ बाढ़ का खतरा
ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के बांध बनाने से अरुणाचल प्रदेश और असम में बाढ़ का खतरा भी मंडराने लगेगा। अगर चीन इस बांध के दरवाजे अचानक खोल देता है, तो अरुणाचल प्रदेश और असम में तबाही मचाने वाली बाढ़ आ सकती है।
◙ भू-राजनीतिक खतरा
चीन का यह बांध, भारत के लिए भू-राजनीतिक खतरा भी है। आगे जाकर अगर दोनों देशों में बॉर्डर पर तनाव हुआ, तो चीन, इस बांध का इस्तेमाल भारत पर दबाव बनाने के लिए कर सकता है।
◙ पर्यावरणीय और पारिस्थितिक नुकसान
ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध का निर्माण हिमालय के ऐसे संवेदनशील इलाके में हो रहा है, जो टेक्टोनिक प्लेट बॉर्डर पर स्थित है। ऐसे में जब यह बांध बनकर तैयार हो जाएगा, तो इससे भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में भूकंप या भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।
◙ सामाजिक और आर्थिक प्रभाव
ब्रह्मपुत्र नदी, अरुणाचल प्रदेश और असम के लिए बेहद ज़रूरी है। इस पर बांध बनने से इन दोनों राज्यों के लोगों को जल संकट और बाढ़ के खतरे को देखते हुए के विस्थापन के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। इससे उन्हें आर्थिक रूप से परेशानी तो होगी ही, साथ ही विस्थापन से सामाजिक अस्थिरता भी बढ़ सकती है। बांध की वजह से असम और पश्चिम बंगाल के बीच व्यापार भी प्रभावित हो सकता है।
ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के बांध बनाने की इस हरकत का भारत भी जवाब देने की तैयारी में है। चीन की साजिश से होने वाले खतरे को कम करने के लिए भारत ने अरुणाचल प्रदेश में सियांग नदी पर एक बैराज बनाने की योजना शुरू की है, जो जल प्रवाह को नियंत्रित कर बाढ़ के खतरे को कम करेगा। इतना ही नहीं, भारत ने कूटनीतिक और एक्सपर्ट लेवल पर चीन के इस प्रोजेक्ट पर चिंता व्यक्त की है और निचले इलाकों के हितों को नुकसान न पहुंचे, इसकी मांग की है। हालांकि चीन ने अंतरराष्ट्रीय जल संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जिससे उस पर दबाव बनाना आसान नहीं है।
Published on:
14 Apr 2026 01:50 pm
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