
डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग (Photo- IANS)
China-US Tensions: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हाल में चीन के दौरे पर गए। उनके साथ कई बड़े अमरीकी उद्योगपति भी गए। इस दौरान ट्रंप ने चीन के साथ दोस्ती के कसीदे भी पढ़े। राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भी काफी प्रशंसा की, हालांकि इस यात्रा से डोनाल्ड ट्रंप को कोई बड़ी डील कर पाने में सफलता नहीं मिली। चीन से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ताइवान को सैन्य मदद के मुद्दे पर पीछे हटते भी दिखे, लेकिन यात्रा खत्म होने के बाद अमेरिका फिर से चीन को घेरने में जुट गया है। बीते 15 दिनों में क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की भारत में हुई बैठक हुई जिसके लिए अमेरिकी विदेश मंत्री तीन दिन के भारत दौरे पर आए। ईरान युद्ध के बीच अमेरिकी युद्धमंत्री ने सिंगापुर में शांगरी-ला संवाद में हिस्सा लिया और चीन को लेकर बयान भी दिया। साथ ही ताइवान पर भी अमेरिका का रुख बदल गया।
शांगरी-ला संवाद के दौरान अमेरिकी युद्धमंत्री पीट हेगसेथ ने भारत को वाशिंगटन की हिंद-प्रशांत रणनीति में एक महत्वपूर्ण आधार बताया। साथ ही कहा कि भारतीय औद्योगिक क्षमता क्षेत्र में तैनात अमेरिकी नौसेना के जहाजों को सीधा समर्थन देगी। ऐसा दावा ईरान युद्ध के दौरान भी अमेरिका की ओर से किया गया था। जिस पर भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई थी। वहीं रविवार को जापान के रक्षामंत्री ने क्वाड देशों के रक्षामंत्रियों की बैठक का प्रस्ताव रखा। जिसका उद्देश्य इस समूह को अगले चरण तक ले जाना है। हालांकि क्वाड देशों का समूह अभी तक सैन्य गठबंधन की बजाय व्यावहारिक सहयोग पर ही जोर देता रहा है।
राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन यात्रा के बाद ताइवान पर अपने रुख को बदला था। उन्होंने कहा था कि उसकी स्वतंत्रता के लिए अमेरिका हजारों मील दूर युद्ध नहीं लड़ेगा। ताइवान को यथास्थिति बनाए रखने की सलाह भी दी और हथियार सौदे को टाल दिया। हालाकि बाद में पेंटागन ने स्पष्ट किया कि अमेरिका वन चाइना नीति को मान्यता देने के बावजूद ताइवान को उसकी रक्षा के लिए हथियार मुहैया कराता रहेगा।
Updated on:
1 Jun 2026, 12:05 AM IST
Published on:
1 Jun 2026, 12:05 AM IST
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