धर्म/ज्योतिष

धन-संपत्ति के लिए श्रेष्ठ हो सकता है 31 अक्टूबर तक का समय, मान- सम्मान का भी योग

Guru gochar 2026: उच्च राशि में उदित होकर बृहस्पति ने बनाया धन दौलत और मान सम्मान महा संयोग, आर्थिक संकट और तनाव समाप्त
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Updated: 19 Aug 2026, 1:44 PM IST
dhan yoga formed by guru for cancer zodiac sign
कर्क राशि के देवगुरु से बना धन योग- image patrika.com

Guru Uday 2026: नवग्रहों में बृहस्पति को ज्ञान और धर्म के साथ संतान, धन व वैभव का कारक भी माना जाता है। वे देवगुरु कहे जाते हैं। बृहस्पति को सबसे शुभ ग्रह माना जाता है। कुंडली में उनकी स्थिति कितनी भी बुरी क्यों न हो, गुरु की महादशा में जातक को सुख जरूर प्राप्त होता है। देवगुरु बृहस्पति 14 अगस्त को अपनी उच्च राशि कर्क में उदित हो चुके हैं। गुरु के अस्त रहने के कारण उनके शुभ प्रभाव क्षीण हो गए थे लेकिन अब उनके उदय होने से स्थिति बदल गई है। गुरु ग्रह के अस्त अवस्था से निकलने न केवल कुछ राशियों के लोगों के जीवन से आर्थिक संकट और तनाव समाप्त हो गया है बल्कि इससे एक महा-संयोग भी बन रहा है। देवगुरु बृहस्पति 31 अक्टूबर 2026 तक कर्क राशि में रहेंगे। इसके बाद वे सिंह राशि में गोचर करेंगे। उच्च राशि में स्थित बृहस्पति से धन दौलत के साथ मान सम्मान भी मिलने का महायोग बन रहा है।

ज्योतिष शास्त्र में गुरु और शुक्र की अस्तावस्था अच्छी नहीं मानी जाती है। यही कारण है कि इन दोनों ग्रहों के इस गोचर के दौरान विवाह नहीं किए जाते। देवगुरु बृहस्पति की अस्त अवस्था बहुत कष्टकारी साबित होती है। जिन लोगों की कुंडली में भी गुरु अस्त है, उन जातकों को इस गोचर के अवधि के दौरान बहुत कठिनाइयां सहनी पड़ती हैं।

ज्योतिषाचार्य पंडित अरुण बुचके बताते हैं कि देवगुरु बृहस्पति के अस्त रहने के दौरान मांगलिक कार्यों और आर्थिक प्रगति में अनेक प्रकार की रुकावटें आती हैं। संतान को या संतान से कष्ट मिलता है। अच्छी बात यह है कि 14 अगस्त को गुरु उदित हो गए हैं। इसी के साथ जीवन में सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य की नई राह प्रशस्त हो चुकी है।

देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में उदित हुए हैं जिससे ग्रहों का एक दुर्लभ महासंयोग भी बन रहा है। ज्योतिष विद बताते है कि कुछ ऐसे योग बन रहे हैं जोकि जातक का पूरा जीवन ही बदल सकते हैं।

उच्च राशि कर्क में उदित देवगुरु बृहस्पति से हंस योग बन रहा

अपनी उच्च राशि कर्क में उदित देवगुरु बृहस्पति से हंस योग बन रहा है। 5 राजयोगों में इसे प्रमुख कहा गया है। हंस योग, प्रमुख रूप से जीवन में धन लाभ और समृद्धि का योग है।

धन दौलत के साथ ही मान सम्मान भी

ज्योतिषाचार्य पंडित सोमेश परसाई बताते हैं कि गुरु ग्रह अपनी उच्च राशि कर्क में विराजमान होकर पंच महापुरुष योगों में से एक अत्यंत शुभ 'हंस राजयोग' का निर्माण कर रहे हैं। इस योग के प्रभाव से धन दौलत के साथ ही मान सम्मान भी मिलता है। हंस योग वाले जातक ज्ञानी, विद्वान और बुद्धिमान होते हैं। समाज में उच्च पदस्थ, प्रतिष्ठित और प्रभावशाली व्यक्तित्व के रूप में पहचाने जाते हैं। ऐसे जातक धार्मिक प्रवृत्ति के और परोपकारी होते हैं।

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19 Aug 2026, 1:44 PM IST
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