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Pongal 2026 Date: किस दिन मनाया जाएगा पोंगल का त्योहार? यहां जानिए तिथि और महत्व

Pongal 2026 Date: पोंगल का त्योहार खासतौर पर तमिलनाड़ू में मनाया जाता है। ये पर्व पूरे चार दिनों तक चलता है। ऐसे में चलिए जानते हैं साल 2026 में पोंगल का त्योहार किस दिन से मनाया जाएगा और इसके महत्व के बारे में।
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Jan 06, 2026
Pongal 2026 Date
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Pongal 2026 Date: पोंगल का पर्व दक्षिण भारत में बहुत ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। जब उत्तर भारत में मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है। उसी समय दक्षिण भारत में पोंगल का पर्व मनाया जाता है। पोंगल का त्योहार चार दिनों तक चलता है। चार दिनों तक चलने वाले इस पर्व को अलग- अलग नाम से जाना जाता है। इस चार दिवसीय त्योहार को भोगी पोंगल, सूर्य पोंगल, मट्टू पोंगल और कन्या पोंगल के नाम से जाना जाता है। सूर्य पोंगल के दिन सूर्य देवता को नये फसल अर्पित किये जाते हैं और आने वाले अच्छी फसल के लिए कामना की जाती है। ये त्योहार तमिलनाड़ू में विशेषरूप से मनाया जाता है। पोंगल को तमिल नववर्ष के रूप में भी मनाया जाता है, इसलिए इसकी तिथि भी वहां के पंचांग के द्वारा निर्धारित की जाती है। आइए जानते हैं साल 2026 में पोंगल का त्योहार कब मनाया जाएगा।

Pongal 2026 Date (पोंगल 2026 डेट)


पोंगल का त्योहार हर साल सौर पंचांग के हिसाब से तमिल माह की पहली तिथि के दिन मनाया जाता है। इस साल पोंगल का पर्व 14 जनवरी से लेकर 17 जनवरी 2026 तक मनाया जाएगा। इस साल 14 जनवरी के दिन मकर संक्रांति का त्योहार भी मनाया जाएगा। इस दिन संक्रांति का क्षण शाम 5 बजकर 43 मिनट पर होगा।

कैसे मनाया जाता है पोंगल

पोंगल का पहला दिन- पोंगल का पहला दिन भोगी पोंगल के नाम से जाना जाता है। इस दिन इंद्रदेव की पूजा की जाती है और पुराने चीजों को जलाकर नई जीवन की शुरुआत की जाती है। इस दिन महिलाएं अलाव के चारों तरफ नृत्य करती है और लोकगीत गाती हैं।

पोंगल का दूसरा दिन- पोंगल का दूसरा दिन सूर्य पोंगल का होता है। इसको थाई पोंगल के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान सूर्य की पूजा की जाती है। इस दिन खुले स्थान पर दूध,चावल और गुड़ की खीर बनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि खीर अगर बाहर की तरफ उफान मारती है तो सुख, समृद्धि आती है।

पोंगल का तीसरा दिन- पोंगल का तीसरा दिन मट्टू पोंगल होता है। इस पशुपालन करने वाले लोग अपने गाय, बैल को नहाकर सजाते हैं और उनकी पूजा की जाती है। कृषि में पशुओं के योगगान के लिए इस दिन उनको धन्यवाद किया जाता है।

पोंगल का चौथा दिन- पोंगल का चौथा दिन कानुम या कन्या पोंगल होता है। इस दिन सारे लोग एक दूसरे एक घर जाते हैं और मिलते जुलते हैं। समाजिक सद्वभाव के लिए ये दिन खास माना जाता है।

पोंगल का महत्व

पोंगल का पर्व नई फसल के आगमन के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। इस त्योहार का सांस्कृतिक और धार्मिक दोनों ही महत्व बहुत ज्यादा है। इस दिन सूर्य देवता और इंद्रदेवता के प्रति आभार प्रकट किया जाता है। इसके साथ ही पशुओं की पूजा करके उनका आभार जताया है। इस दिन पशुओं की पूजा करते हैं और अच्छी फसल की सूर्य देव और इंद्रदेव से कामना की जाती है। ये त्योहार किसान वर्ग के लिए बहुत खास होता है। इस पर्व को तमिल की आत्मा के रूप में भी देखा जाता है।

Updated on:
06 Jan 2026 12:11 pm
Published on:
06 Jan 2026 12:05 pm