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Sheetala Ashtami Kab Hai: कब है शीतला अष्टमी, इस दिन क्यों खाया जाता है बासी खाना

Sheetala Ashtami 2026 कब है? जानें 11 मार्च 2026 को शीतला अष्टमी (बसोड़ा) और कालाष्टमी का अद्भुत संयोग, बासी खाना खाने की परंपरा का धार्मिक व वैज्ञानिक कारण, काल भैरव उपाय, क्या करें और क्या न करें।
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भारत

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Manoj Vashisth

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Updated: 24 Feb 2026, 4:49 PM IST

Sheetala Ashtami Kab Hai

Sheetala Ashtami Kab Hai : 11 मार्च को शीतला अष्टमी और कालाष्टमी का दुर्लभ संयोग (फोटो सोर्स: Gemini AI)

Sheetala Ashtami kab hai : 11 मार्च 2026 की तारीख अपने कैलेंडर में अभी मार्क कर लीजिए, क्योंकि उस दिन आपकी रसोई का चूल्हा बंद रहेगा। सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन इस दिन ताजा खाना आपकी सेहत बिगाड़ सकता है और एक रात पहले का बना बासी खाना अमृत की तरह काम करेगा। यहां जानें इस दिन का पूरा रहस्य और वह खास उपाय जो आपकी सेहत और किस्मत दोनों बदल सकता है:

शीतला अष्टमी और कालाष्टमी का अद्भुत संयोग

साल 2026 में 11 मार्च को एक बहुत ही दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन शीतला अष्टमी (Basoda) और चैत्र कालाष्टमी दोनों एक साथ पड़ रही हैं। हिंदू धर्म में शीतला माता को चेचक, खसरा और त्वचा रोगों से बचाने वाली देवी माना जाता है, वहीं भगवान काल भैरव (कालाष्टमी के स्वामी) नकारात्मक ऊर्जा और भय का नाश करते हैं।

बासी खाना क्यों बनेगा अमृत?

शीतला अष्टमी के दिन बासोड़ा मनाने की परंपरा है। इस दिन घर में ताजा खाना नहीं बनाया जाता। मान्यता है कि इस दिन मां शीतला को ठंडे पकवानों (जैसे मीठे चावल, दही, राबड़ी) का भोग लगाया जाता है और परिवार वही प्रसाद ग्रहण करता है।

वैज्ञानिक कारण: होली के बाद जब मौसम तेजी से बदलता है, तो शरीर में पित्त और गर्मी बढ़ने लगती है। आयुर्वेद और विज्ञान के अनुसार, इस समय ठंडा और हल्का भोजन करने से शरीर का तापमान संतुलित रहता है और संक्रमण (Infections) का खतरा कम हो जाता है।

शाम को काल भैरव का सुरक्षा कवच

दिन में जहां आप माता शीतला से अच्छी सेहत मांगेंगे, वहीं सूरज ढलते ही कालाष्टमी का प्रभाव शुरू हो जाएगा। अगर आपको किसी अनहोनी का डर रहता है, बच्चों को नजर लगती है या घर में भारीपन महसूस होता है, तो शाम को यह एक काम जरूर करें:

अचूक उपाय: सूर्यास्त के बाद भगवान काल भैरव के नाम पर सरसों के तेल का एक दीपक जलाएं। इससे घर की सारी नेगेटिविटी और बुरी नजर तुरंत खत्म हो जाती है।

इस दिन क्या करें और क्या न करें?

तैयारी पहले करें: शीतला अष्टमी का भोजन 10 मार्च की रात को ही बना लेना चाहिए। 11 मार्च को गलती से भी तवा या कढ़ाई गैस पर न चढ़ाएं।

नीम का प्रयोग: माता शीतला को नीम बहुत प्रिय है। इस दिन नहाने के पानी में नीम की पत्तियां डालना और घर के मुख्य द्वार पर नीम की टहनी लगाना बहुत शुभ और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है।

दान का महत्व: इस दिन किसी जरूरतमंद को ठंडा भोजन या पानी पिलाने से पुण्य की प्राप्ति होती है और कुंडली के 'राहु-केतु' दोष भी शांत होते हैं।

अस्वीकरण (Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। हम इसकी पूर्ण सटीकता या सफलता की गारंटी नहीं देते हैं। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें।