अयोध्या

आखिर अयोध्या के हनुमानगढ़ी में किसने पढ़वाई थी नमाज? जानिए क्या है उसका इतिहास?

UP CM Yogi Adityanath: अयोध्या के हनुमानगढ़ी में नमाज विवाद आखिर कैसे शुरू हुआ? रोजा इफ्तार कार्यक्रम से लेकर हाईकोर्ट और फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान। जानिए इस पूरे विवाद का इतिहास।
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Jul 10, 2026
cm yogi Ayodhya Hanuman Garhi
क्या सचमुच अयोध्या के हनुमानगढ़ी में पढ़वाई गई थी नमाज? सीएम योगी ने किस पर साधा निशाना। (सोर्स: ANI)

Ayodhya Hanuman Garhi Controversy: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हालिया बयान के बाद अयोध्या की सबसे फेमस हनुमानगढ़ी एक बार फिर चर्चा में है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछली सरकारों के दौरान हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। उनका सीधा इशारा सपा और कांग्रेस पर था। ऐसे में चलिए जानते हैं, आखिर हनुमानगढ़ी में नमाज का मामला क्या था? ये कितने साल पुराना मामला है? इसकी शुरुआत कैसे हुई? समझिये पूरा इतिहास।

2003 में रोजा इफ्तार से शुरू हुआ पूरा मामला

दरअसल, हनुमानगढ़ी से जुड़ा विवाद वर्ष 2003 का है। उस समय अयोध्या विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालने और हिंदू-मुस्लिम समुदाय के बीच संवाद बढ़ाने की पहल के तहत हनुमानगढ़ी स्थित महंत ज्ञान दास के आश्रम में रोजा इफ्तार का आयोजन किया गया था।

इस कार्यक्रम में बाबरी मस्जिद मामले के प्रमुख हाशिम अंसारी, मुस्लिम नेता सादिक अली समेत मुस्लिम समुदाय के कई लोग शामिल हुए थे। लेकिन इसी इफ्तार कार्यक्रम के बाद आरोप लगा कि कार्यक्रम के दौरान हनुमानगढ़ी परिसर में नमाज भी पढ़ी गई। यही आरोप बाद में बड़े विवाद की वजह बना। हालांकि, इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग दावे किए गए और यह राजनीतिक व धार्मिक बहस का विषय बन गया।

हनुमानगढ़ी के ही महंत धर्मदास ने इस पूरे मामले का विरोध किया। उनका कहना था कि मंदिर परिसर में इस तरह के आयोजन नहीं होने चाहिए। इसके बाद मामला अदालत तक पहुंच गया।

हाईकोर्ट पहुंचा मामला

विवाद बढ़ने के बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में पहुंचा। सुनवाई के दौरान अदालत ने हनुमानगढ़ी परिसर में रोजा इफ्तार के आयोजन पर रोक लगा दी। इसके बाद इस मामले को लेकर कई वर्षों तक बहस चलती रही।

बताया जाता है कि 2005 तक यह विवाद लगातार चर्चा में रहा। बाद में बढ़ते विवाद को देखते हुए महंत ज्ञान दास ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की कि भविष्य में हनुमानगढ़ी परिसर में रोजा इफ्तार का आयोजन नहीं कराया जाएगा।

योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद फिर चर्चा में आया मामला

आज शुक्रवार को अयोध्या में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछली सरकारों के दौरान हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जामा मस्जिद में हनुमान चालीसा का पाठ कराया जा सकता है? क्या कोई सरकार, समाजवादी पार्टी या कांग्रेस ऐसा करवा सकती है? अगर नहीं, तो हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज' पढ़ने का पाप क्यों होने दिया गया? उनके इस बयान के बाद अयोध्या के कई संतों ने उनका समर्थन किया और समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा।

संतों का मामले पर क्या है कहना?

तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस दास ने कहा कि सनातन धर्म को मानने वाले हर किसी को CM योगी आदित्यनाथ की बात सुननी चाहिए। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने ही हनुमान गढ़ी में नमाज पढ़वाई थी। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राम राज्य स्थापित हुआ है। जो कोई भी गलत करता है, उसकी जांच हो रही है। जो दोषी पाए जाते हैं उन्हें राम मंदिर दान चोरी मामले में सजा दी जा रही है।

Updated on:
10 Jul 2026 06:55 pm
Published on:
10 Jul 2026 06:55 pm
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