
Ayodhya Ram Mandir: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मंदिर में आने वाला दान किसी व्यक्ति या संस्था का नहीं, बल्कि भगवान का होता है। ऐसे में यदि दान राशि के प्रबंधन को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थानों में आने वाले चढ़ावे और दान को लेकर पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। श्रद्धालु अपनी आस्था के साथ दान देते हैं और उस विश्वास को किसी भी कीमत पर ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए।
राम मंदिर में कथित चंदा विवाद को लेकर कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने तीखे सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने राम मंदिर का निर्माण कराया है, उन्हें इस विवाद पर जवाब देना होगा। खुर्शीद ने कहा कि भगवान राम के प्रति सभी की आस्था है, चाहे वे सनातन धर्म से जुड़े हों या किसी अन्य माध्यम से श्रद्धा रखते हों। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग राम मंदिर पर अपना एकाधिकार जताते हैं और हर मंच पर इसकी दुहाई देते हैं, क्या उन्होंने भगवान राम की आस्था से ऊपर धन को रख दिया? उन्होंने कहा कि यह गंभीर सवाल है कि कहीं पैसे की चाहत में राम के प्रति श्रद्धा को भुला तो नहीं दिया गया।
कैलाश विजयवर्गीय के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए खुर्शीद ने कहा, "अगर हम सड़क पर न चलें तो कहां जाएं? क्या इस देश में रहें या नहीं? विजयवर्गीय को अपने बयान की समझ होनी चाहिए। यह सड़क हिंदुओं, मुसलमानों और ईसाइयों सबने मिलकर बनाई है।"
उन्होंने आगे कहा कि सड़क नहीं, देश की बात होनी चाहिए। आजादी की लड़ाई में सभी धर्मों के लोग कंधे से कंधा मिलाकर लड़े थे और तब किसी को हिंदू या मुसलमान नहीं, बल्कि भारतवासी कहा जाता था। खुर्शीद ने कहा कि देशवासियों ने मिलकर इस राष्ट्र का निर्माण किया है, लेकिन आज उन्हें बांटने की कोशिश की जा रही है।
कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने आगे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर निशाना साधा हुए कहा कि धर्मेंद्र प्रधान की बातें केवल कागजी या हवाई दावों तक सीमित हैं, लेकिन उन्हें जमीन पर दिख रही असलियत का जवाब देना चाहिए।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुले रहने के मुद्दे पर सलमान खुर्शीद ने कहा कि इसे खुला रखने के लिए पहल की गई है। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में भारत की ओर से भी पेशकश की गई थी। खुर्शीद ने कहा कि जब ईरान की एक कश्ती को यहां डुबोया गया था, तब भारत की ओर से कोई शिकायत तक नहीं की गई। इसके बावजूद ईरान ने भारत पर कोई आरोप नहीं लगाया। उन्होंने कहा कि ईरान काफी उदार देश है और भारत-ईरान के संबंध काफी पुराने हैं। ऐसे में भारत को ईरान का आभार व्यक्त करना चाहिए।