
अयोध्या में श्री राम मंदिर। ( फोटो : patrika.com)
Ayodhya Ram Mandir Donation Case: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने मंगलवार को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी। SIT की टीम सुबह प्रमुख सचिव (गृह) संजय प्रसाद के कार्यालय पहुंची और उन्हें रिपोर्ट हस्तांतरित की। टीम ने स्पष्ट किया कि यह अभी शुरुआती रिपोर्ट है और जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
रिपोर्ट करीब 150 पन्नों की बताई जा रही है। इसमें जांच के दौरान 150 से अधिक लोगों से की गई पूछताछ का विस्तृत विवरण दर्ज है। सूत्रों के अनुसार, SIT ने रिपोर्ट में कई अहम सिफारिशें की हैं।
7 जून को समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री रहे पवन पांडेय ने राम मंदिर के चढ़ावे से 5 से 7.5 करोड़ रुपये की कथित चोरी का आरोप लगाया। उनके आरोपों के बाद मामला सुर्खियों में आया। इसके बाद सपा प्रमुख Akhilesh Yadav ने सोशल मीडिया के जरिए मुद्दा उठाया और अदालत से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की। उन्होंने सोशल मीडिया X पर लिखा समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि ‘राम मंदिर’ के चढ़ावे की करोड़ों कि की रकम गायब पायी गई है। ये मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है। कोई भी सफ़ाई देने के लिए सामने नहीं आना चाहता है। न्यायालय से स्वतः संज्ञान लेने की माँग है क्योंकि इसका सीधा संबंध वैश्विक स्तर पर समस्त सनातनी समाज की प्रभु राम में गहरी आस्था से जुड़ा है। सरकार की चुप्पी संदिग्ध है।
9 जून को भाजपा नेता Rajneesh Singh ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की सीबीआई और ईडी से जांच कराने की मांग की। इसी दिन राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष Nripendra Mishra ने ट्रस्ट सदस्यों के साथ बैठक कर चढ़ावे की राशि, उसकी गिनती और लेखा-जोखा को लेकर चर्चा की।
10 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने मंदिर ट्रस्ट से पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी। दूसरी ओर, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया। 11 जून को मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह का बयान सामने आया। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज और चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश पर तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। टीम में विजय विश्वास पंत, IAS, मंडलायुक्त लखनऊ, किरन एस, IPS, आईजी रेज, नील रतन, विशेष सचिव, वित्त विभाग को शामिल किया गया। टीम को पूरे मामले की जांच कर रिपोर्ट सौंपने की जिम्मेदारी दी गई।
Updated on:
23 Jun 2026 12:29 pm
Published on:
23 Jun 2026 12:01 pm
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