शिक्षा विभाग में एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है, जिससे विभाग की छवि धूमिल होने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक ने संबंधित प्रधान सहायक के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाया है। जांच में प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि प्रधान सहायक द्वारा अपने […]
शिक्षा विभाग में एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला सामने आया है, जिससे विभाग की छवि धूमिल होने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक ने संबंधित प्रधान सहायक के विरुद्ध कड़ा रुख अपनाया है। जांच में प्रथम दृष्टया यह पाया गया कि प्रधान सहायक द्वारा अपने दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही बरती गई, जो न्यायालय के आदेशों की अवहेलना की श्रेणी में आती है।
जिला विद्यालय निरीक्षक ने इस कृत्य को सरकारी सेवक नियमावली 1956 के विपरीत आचरण मानते हुए प्रधान सहायक श्री दिनेश कुमार मौर्य के तत्काल प्रभाव से निलंबन की संस्तुति संयुक्त शिक्षा निदेशक, आजमगढ़ मंडल को भेज दी है। अधिकारियों का कहना है कि इस लापरवाही के कारण न केवल विभागीय कार्य प्रभावित हुआ, बल्कि विभाग की सार्वजनिक छवि को भी नुकसान पहुंचा है।
इसके साथ ही जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा थाना कोतवाली आजमगढ़ के प्रभारी को पत्र भेजकर संबंधित प्रधान सहायक के विरुद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि मामला प्रशासनिक अनुशासनहीनता के साथ-साथ विधिक अवमानना से भी जुड़ा हुआ है, जिसे किसी भी स्थिति में अनदेखा नहीं किया जा सकता।
इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। विभागीय अधिकारी और कर्मचारी इस प्रकरण को लेकर चर्चा में हैं। सूत्रों के अनुसार, उच्च स्तर पर भी इस मामले की निगरानी की जा रही है और आगे की कार्रवाई संयुक्त शिक्षा निदेशक के निर्णय के बाद की जाएगी।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि न्यायालय के आदेशों का पालन करना सभी कर्मचारियों का अनिवार्य कर्तव्य है। किसी भी स्तर पर लापरवाही या आदेशों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कार्रवाई विभागीय अनुशासन बनाए रखने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उद्देश्य से की गई है।