…तो कयामत से कम नहीं आज की रात

आखिरी दिन सभी ने खोल दिया है खजाना,  रातो-रात सदस्यों को सही ठिकाने पर पहुंचाने की हो रही व्यवस्था

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Feb 06, 2016
आजमगढ़. अजीब माहौल है! कहीं बाहुबलियों की दहशत तो कहीं सत्ता का डर, डरे सहमे से क्षेत्र पंचायत सदस्य। चर्चा बस एक बात की कल क्या होगा। कहां कौन भारी पड़ेगा। किसकी साख बचेगी और किसकी लुटिया डुबेगी। कहीं पिछले चुनाव की तरह इस बार भी खूनी खेल तो नहीं होगा। एक पखवारे से जिस तरह सत्ता और विपक्ष के लोग कुछ खास सीटों को लेकर आमने सामने हैं रविवार को क्या करेंगे। सदस्य और उनके परिजन सहमे हुए हैं कि कहीं रात में ही कोई उन्हें उठा न ले। कुछ घर छोड़कर फरार हैं तो अपने खास प्रत्याशी के यहां शरण लिये है।

सब मिलाकर सदस्यों के लिए आज की रात कयामत की रात से कम नहीं है। वहीं प्रत्याशी अंतिम समय पर पिटारा खोल दिये हैं। खरीद फरोख्त का खुला खेल चल रहा है। प्रशासन इन सब से परे पूरी ताकत इस बात के लिए लगा रहा है कि रविवार का दिन सकुशल बीत जाय।
गौर करें तो पूर्वांचल में क्षेत्र पंचायत की सबसे अधिक 22 सीट आजमगढ़ जिले में है। यहां 19 सीटों पर रविवार को मतदान होना है। अन्य जिलों की बात करें तो बलिया के 17 में 7, वाराणसी के 8 में 6, सोनभद्र के 5 में 1, गाजीपुर के 16 में 11, मऊ के 9 में 8, मीरजापुर के 12 में 10, जौनपुर के 21 में 13, भदोही के 6 में 2 तथा चंदौली के 9 में 5 सीटों पर मतदान होना है। बाकी सीटों पर सत्ता पक्ष ने पहले ही कब्जा जमा लिया है। कारण कि विपक्ष ने ज्यादातर सीटों पर प्रत्याशी ही नहीं उतारा है।

आजमगढ़ में सबसे अधिक सीटें हैं तो यहां मतदान भी सबसे अधिक सीटों पर होना है। सत्ता व विपक्ष के बीच खींचतान भी यहां सबसे अधिक दिख रही है। खासतौर पर फूलपुर सत्ताधारी विधायक श्यामबहादुर यादव के भाई सुरेंद्र यादव व भाजपा के पूर्व सांसद रमाकांत के भाई की बहू अर्चना यादव के मैदान में होने से यहां सबसे अधिक घमासान है। भाजपा सांसद व सत्ता पक्ष के लोग दो बार आमने-सामने हो चुके हैं। पहले पवई में दोनों पक्षों में फायरिंग हुई फिर शुक्रवार की रात विधायक द्वारा पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य की पिटाई को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने हुए। वैसे सत्ता पक्ष ने पूर्व सांसद को जेल भेजने की तैयारी कर ली थी लेकिन न्यायालय का आदेश आड़े आ गया। ठेकमा में बाहुबली मुन्ना सिंह मैदान में हैं।

पिछले चुनाव में उनकी पत्नी ब्लाक प्रमुख चुनी गयीं थी। उस समय सत्ता बसपा की थी, यहां काफी बवाल हुआ था। अजमतगढ़ में बाहुबली ध्रुव कुमार सिंह कुंटू की पत्नी चुनाव लड़ रही हैं। वैसे यहां सत्ता पक्ष का कोई प्रत्याशी नहीं है पर सत्ताधारी दल का यह प्रयास है कि निर्दल के ही कंधे पर बंदूक रखकर चलायी जाय। रहा सवाल सठियांव का तो यहां बसपा के पूर्व मंत्री चंद्रदेव राम यादव करैली की बहू मैदान हैं तो सपा के पूर्व मंत्री यशवंत सिंह ने अपने खास को मैदान में उतारा है।

दो दिन पूर्व यहां भी विवाद हो चुका है। जहानागंज सीट पर भी कुंटू सिंह का सीधा हस्तक्षेप है। इन सभी सीटों पर सत्ता व बाहुबल के बीच संघर्ष देखने को मिलेगा। अन्य सीटों पर सत्ताधारी दल के सामने प्रत्याशी भले ही बाहुबली न हो लेकिन धन बल में सत्ता को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। अब तक कई सदस्यों को अगवा करने का मामला भी सामने आ चुका है। तमाम सदस्य ऐसे हैं जिन्हें प्रत्याशियों ने जिले से दूर हटा दिया है। उन्हें आधी रात के बाद जिले में लाने की तैयारी चल रही है। अंतिम दिन पक्ष व विपक्ष सभी ने धन का पिटारा खोल दिया है। कुछ सदस्य ऐसे हैं जिनका ताल्लुक किसी से नहीं है। इन पर सभी की नजर है ये बिचारे डरे सहमे हुए हैं। अब तक निर्णय नहीं कर पाये हैं कि जाये तो जायें किसके साथ। एक तरफ सत्ता है तो दूसरी तरफ बाहुबल। सब मिलाकर चुनाव दिलचस्प होगा यह तो तय है।
Published on:
06 Feb 2016 07:33 pm
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