आजमगढ़

चुनाव में दांव पर बीजेपी के बाहुबली की साख…

क्या पहली पत्नी को बना पाएंगे नगरपंचायत का पहला चेयरमैन ?

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Nov 17, 2017
Formal bjp mp Ramakant yadav

आजमगढ़. नव सृजित नगरपंचायत माहुल से अध्यक्ष पद के लिए पूर्व सांसद रमाकांत यादव ने अपनी पहली पत्नी सत्यभामा को भाजपा के टिकट पर मैदान में उतारा है। चुनाव में जीत हासिल करने के लिए उन्होंने पूरी ताकत झोंक दी है। लेकिन अल्पसंख्यक और सवर्ण मत अधिक होने के कारण रमाकांत की राह आसान नहीं दिख रही है। यदि सवर्ण विरोध का जिन्न फिर सामने आया तो रमाकांत का कुर्सी का सपना टूट सकता है।


बता दें कि आजमगढ़ जिले में पहले दो नगरपालिका और दस नगरपंचायत थी। पिछले दिनों सपा सरकार में माहुल को नगर पंचायत का दर्जा दिया गया। इस नगर पंचायत में पहली बार चुनाव हो रहा है। यह नगर पंचायत क्षेत्र भाजपा के बाहुबली पूर्व सांसद रमाकांत यादव के अंबारी आवास से छह किमी की दूरी पर है।


यहां कांग्रेस ने अबूशाद पुत्र अबूवकर, बसपा ने शौकत पुत्र मोहब्बत, सपा ने कुसुम पत्नी देवीश चंद को मैदान में उतारा है। वहीं भाजपा से पूर्व सांसद रमाकांत यादव की पत्नी सत्यभामा देवी मैदान में है। आम आदमी पार्टी ने सुदामा पुत्र राम प्रताप पर दाव खेला है। इसके अलावा चौदह निर्दल प्रत्याशी मैदान में है। यानि कुल 19 लोग अध्यक्ष पद के लिए किस्मत आजमा रहे है।


निर्दल उम्मीदवारों में बदरे आलम पुत्र शाह आलम, श्रवण कुमार पुत्र राधेश्याम, नजरे आलम पुत्र शाह आलम, गुड्डी पत्नी ओमप्रकाश, महेंद्र यादव पुत्र स्व. रामचेत यादव, मुहम्मद अशरफ पुत्र मुहम्मद सदरूद्दीन, ओमप्रकाश पुत्र केदारनाथ, गीता पत्नी ओम प्रकाश, हरिश्चंद्र पुत्र रामफेर, सूबेदार पुत्र रामनाथ, जय प्रकाश पुत्र शिवनरायन, रेखा पत्नी जय प्रकाश, सदरूद्दीन पुत्र महमूद शामिल है।


कांग्रेस और बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में उतार कर रमाकांत यादव का काम थोड़ा आसान कर दिया है लेकिन इनके सामने सबसे बड़ी चुनौती सवर्णो का वोट हासिल करना। कारण कि रमाकांत की छबि सवर्ण विरोधी की है और मुस्लिम वोट के बाद ब्राह्मणों का वोट काफी अधिक है।


हाल ही में पल्थी के एक युवक से बात करते समय सवर्णो को अपशब्द कहने का आडियो वायरल हुआ था। जिसके बाद कई सवर्ण संगठनों ने रमाकांत यादव के खिलाफ आवाज उठाई थी। रमाकांत यादव के लिए अपनी पहली पत्नी को चुनाव जिताना एक बड़ी चुनौती। कारण कि यदि सत्यभामा चुनाव हार गयी तो रमाकांत यादव की किरकिरी होगी और हर चुनाव में चार पांच टिकट की दावेदारी करने वाले रमाकांत के लिए लोकसभा चुनाव में दावा करना मुश्किल हो जाएगा।

Published on:
17 Nov 2017 11:24 pm
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