आजमगढ़

बेमौसम बरसात ने बढ़ाई किसानों की मुश्किल, खलिहान व क्रय केंद्र पर भीगा हजारों कुंतल गेंहू

बिना मौसम के मंगलवार को हुई झमाझम बरसात ने किसानों की मुश्किल बढ़ा दी है। किसानों ने उत्पाद बेचने के लिए फसल खलिहान अथवा घर के बाहर ही छोड़ रखा था। वहीं बड़ी संख्या में लोेग क्रय केंद्र पर भेजकर तौल होने की प्रतीक्षा कर रहे थे। इसी बीच एकाएक हुई बरसात से गेंहू भीग गया। अब इसके सड़ने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
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Updated: 18 May 2021, 2:56 PM IST
बरसात में पालीथिन से ढ़ककर गेंहू बचाने की कोशिश
बरसात में पालीथिन से ढ़ककर गेंहू बचाने की कोशिश

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
आजमगढ़. टाक्टे तूफान का असर मंगलवार को पूर्वांचल के कई जिलों में देखने को मिला। कुछ जिलो में आसमान में घने काले बादल छाये रहने के कारण जहां गर्मी से राहत मिली तो आजमगढ़ में झमाझम बरसात से भारी नुकसान हुआ। किसानों का गेंहू खलिहान व क्रय केंद्रों पर भीगता नजर आया। इससे गेंहू के सड़ने का खतरा उत्पन्न हो गया है। किसान इसके लिए क्रय केंद्र पर फैले भ्रष्टाचार को जिम्मेदार मान रहे हैं। कारण कि क्रय केंद्र के लोग किसानों से अधिक बिचैलियों का गेंहू खरीदनों को प्राथमिकता दे रहे है। कारण कि धान की तरह गेंहू में कटौती कर उन्हें कमाई का मौका नहीं मिल रहा है।

बता दें कि रबी के सीजन में बरसात न होने सेे इस बार गेंहू का उत्पादन प्रभावित हुआ है। किसान जहां 7 से 8 कुंतल प्रति बीघा गेंहू का उत्पादन करता था इस बार सिर्फ 5 से 6 कुंतल उत्पादन हुआ है। गेंहू पतला होने से भी किसानों को नुकसान उठाना पड़ा है। एक तरह कोराना की मार तो दूसरी तरफ कम उत्पादन से किसान परेशान है। उसके लिए खरीफ की तैयारी व अन्य जरूरतों को पूरा करना मुश्किल हो गया है। उपर से गेंहू खरीद में खुलेआम मनमानी ने किसानों की मुश्किल बढ़ा दी है।

तमाम किसानों का गेंहू खलिहान या घर के सामने अथवा क्रय केंद्र के सामने पड़ा है। ट्राली में लदकर खड़े गेंहू की तौल न होने से किसान को अतिरिक्त किराया भी देना पड़ रहा है। रही सही कसर मंगलवार को हुई बरसात ने पूरी कर दी। भोर में एकाएक मौसम बदलने और बरसात शुरू होने के कारण किसानों को गेंहू सुरक्षित करने अथवा ढकने का मौका तक नहीं मिला। जब तक लोग पालीथीन आदि से गेंहू ढकते वह भीग चुका था। इससे गेंहू के सड़ने का खतरा उत्पन्न हो गया है।

किसान परेशान हैं। किसान नरेंद्र गुप्ता, आशा, नन्हें सिंह, सीताराम आदि का कहना है कि धान के सीजन में कटौती के नाम पर किसानों को परेशान किया गया। अब क्रय केंद्र पर अधिक काम का बहाना कर तौल नहीं की जा रही है। कारण कि उन्हें पता है कि गेंहू में वे कटौती नहीं कर सकते। किसानों की ट्राली क्रय केंद्र पर खड़ी है और बिचैलियों का गेंहूं सीधे गोदाम तक पहुंच रहा है। उन्हें क्रय केंद्र से बोरा तक मुहैया करा दिया जा रहा है। बिचैलियों गांवों में जाकर किसानों से 1600 से 1650 रुपये कुंतल गेंहू खरीदकर किसानों के नाम पर ही क्रय केंद्र पर बेंच रहे हैं। वहीं क्रय कें पर तैनात कर्मचारी संसाधनों के आभाव का रोना रो रहे हैं। कवरा गहनी क्रय केंद्र के प्रभारी का कहना है कि पल्लेदार की समस्या है। हम क्या कर सकते है। जबकि इस बार इन्हें खाद्यान्न की निकासी से भी मुक्ति दे दी गयी है।

BY Ran vijay singh

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