सीएम के सामने प्रस्ताव रखने की तैयारी में जुटे हैं संगठन
आजमगढ. जिले में विश्वविद्यालय का मुद्दा तूल पकड़ लिया है। कई संगठन इसके लिए मैदान में उतर गए है। पीएम के आगमन के पूर्व ही जिले में केंद्रीय विश्वविद्यालय के घोषणा की मांग की जा रही है। लोग सरकार पर दबाव बनाने के लिए प्रशासन के साथ ही भाजपा नेताओं के माध्यम से सीएम और पीएम को ज्ञापन भेजा जा रहा है। कई बीजेपी नेता भी विश्वविद्यालय का समर्थन कर चुके हैं। अब तैयारी इस बात की है कि, सीएम के आगमन पर उन्हें प्रस्ताव दिया जाय। इसके बाद भी बात नहीं बनती है लोग आंदोलन और पीएम के आगमन का विरोध भी कर सकते हैं।
बता दें कि, जिले में करीब सवा दो सौ महाविद्यालय हैं। सभी पूर्वांचल विश्वविद्यालय से संबद्ध है। विश्वविद्यालय पर अत्यधिक कार्य का बोझ होने के कारण परीक्षाफल आदि समय से घोषित नहीं हो पाता अगर हो गया तो तमाम त्रुटियां होती है। जिसका खामियाजा छात्र भुगतते हैं। इस बार भी तमाम छात्रों का परीक्षाफल अब तक नहीं आया है।
मानक के अनुसार भी 200 कालेजों पर एक विश्वविद्यालय होना चाहिए। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने जिले में विश्वविद्यालय देने का वादा किया था। वर्ष 2015 में सरकार ने एक विद्यापन छपवाया जिसमें आजमगढ़ में विश्वविद्यालय के स्थापना की बात कही गयी थी लेकिन सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया और विश्वविद्यालय की घोषणा बलिया में कर दी गयी।
इसके बाद से ही जिले में विश्वविद्यालय के लिए निरंतर आंदोलन चल रहा है।
यूपी में बीजेपी की सरकार बनी तो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष, स्वास्थ्य मंत्री और डिप्टी सीएम केशव मौर्य के सामने भी विश्वविद्यालय के स्थापना की मांग रखी गयी, लेकिन मांग को अनसुना कर दिया गया।
अब प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार आजमगढ़ आ रहे हैं। वे यहां पूर्वांचल एक्सप्रेस का शिलान्यास करेंगे। जिले के लोग चाहते हैं कि पीएम अगर आजमगढ़ आ रहे हैं तो विश्वविद्यालय की भी घोषणा कर के जाये। यही वजह है कि, जिले में विश्वविद्यालय आंदोलन तेज हो गया है।
आजमगढ़ विकास संघर्ष समिति के संयोजक एसके सत्येन, महाविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष राम प्रवेश सिंह, महाविद्यालय अभियान के संयोजक सुजीत भूषण, छात्र संगठन, अधिवक्ता संघठन, व विभिन्न कालेजों के छात्र लगातार विरोध प्रदर्शन कर शासन को ज्ञापन भेज रहे हैं। शनिवार को भी यह सिलसिला जारी रहा। भाजपा जिलाध्यक्ष जयनाथ सिंह ने भी लोगों की मांग का समर्थन किया है। आम आदमी भी इसे लेकर उत्सुक है। सूत्रों की माने तो पीएम की रैली में यदि विश्वविद्यालय की घोषणा नहीं होती है तो भाजपा को विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है। कारण कि, तमाम लोग इस रैली में पहुंचेगे और जिस तरह अखिलेश के सामने मामला उठा था उसी तरह मोदी के सामने इस मुद्दे को लेकर आवाज बुलंद करेंगे।
input रणविजय सिंह