- संभावित दावेदार होली के बहाने कूदे मैदान में- सीट अपने माफिक कराने की जुगाड़ अभी से शुरू - वर्तमान प्रधानों के खिलाफ भी शुरू हुई मुहीम- आडिट व जन सूचना अधिकार अधिनियम को बनाया जा रहा हथियार
रणविजय सिंह
आजमगढ़. अभी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की घोषणा भले ही नहीं हुई हो लेकिन इसकी सुगबुगाहट के बीच शुरू हुई पैतरेबाजी ने गांवों का सियासी पारा एकाएक बढ़ा दिया है। इस बार की होली भी पंचायत चुनाव के रंग में डूबी नजर आई। संभावितों की नजर सीटों के आरक्षण पर है। अभी से इसे अपने मन माफिक कराने की जुगाड़ शुरू हो गई है तो सोशल आडिट के जरिए प्रधानों की घेरेबंदी भी जारी है। यहीं नहीं वर्तमान प्रधानों की कमियां ढ़ूढ़ने व उन्हें भ्रष्ट साबित करने के लिए जन सूचना अधिकार अधिनियम को खुलकर हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2020 के तहत जिला पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी सदस्य) और सदस्य ग्राम पंचायत का चुनाव अक्टूबर माह में कराने की संभावना है। इसके बाद जनवरी या फरवरी 2021 में जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख का चुनाव एक साथ कराया जाएगा। आयोग के निर्देश पर प्रशासन की तरफ से रिहर्सल भी शुरू कर दी गई है। मतदान केंद्र, मतदेय स्थल बढ़ेंगे तो नए मतदाता भी। साथ ही जिले की दो नवसृजित नगर पंचायत जहानागंज व बूढ़नपुर और विस्तारीकरण के बाद नगर पंचायत अजमतगढ़ से कुछ गांव भी निकलेंगे।
मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य के लिए बूथ लेबल अधिकारी (बीएलओ) और पर्यवेक्षकों की तैनाती सुनिश्चित कर दी गई है। बीएलओ व पर्यवेक्षक की नियुक्ति ऑनलाइन एसडीएम की लागिन की जा रही है। मतदान केंद्र और मतदेय स्थलों का व्यवस्थीकरण किया जा रहा है। इस बार मतदान केंद्र पर छह से अधिक बूथ नहीं रहेंगे। नव सृजित नगर पंचायत जहानागंज से 5 व बूढ़नपुर से 5 और विस्तारीकरण के बाद अजमतगढ़ से दो सहित कुल 12 गांव त्रिस्तरीय सामान्य पंचायत चुनाव 2020 में अलग हो जाएंगे। व्यवस्थीकरण के पूर्व वर्तमान स्थित पर गौर करें तो जिले में कुल 2050 मतदान, 5846 मतदेय स्थल है। यहां 86 जिला पंचायत सदस्य, 2145 क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी), 1871 ग्राम प्रधान, 23000 सदस्य ग्राम पंचायत पद है। व्यवस्थीकरण के बाद कुछ पद बढ़ने की भी संभावना है। प्रशासन चुनाव की तैयारियों में जुटा है। वहीं संभावित दावेदार भी मैदान में कूद पड़े है। होली पर बधाई संदेश के पोस्टर के जरिए इन्होंने अपना इरादा जाहिर कर दिया है।
प्रत्याशियों ने शुरू की मतदाताओं की गणेश परिक्रमा
चुनाव लड़ने के इच्छुक अभ्यर्थियों के मन में आरक्षण को लेकर भारी बेचैनी है। उनके मन में इस बात को लेकर काफी आशंकाएं हैं कि कहीं आरक्षण के चलते वे मैदान में ही न उतर सकें। तमाम आशंकाओं के बावजूद संभावित प्रत्याशियों ने मतदाताओं की गणेश परिक्रमा शुरू कर दी है। बीमार को अस्पताल पहुंचाने से लेकर किसी विवाद की स्थिति में थाने तक पहुंचकर सुलह समझौता कराने का काम शुरू हो चुका है। जोर आजमाइश के लिए तैयार प्रत्याशियों द्वारा मतदाता सूची तैयार कराने में खूब दिलचस्पी ली जा रही है। चाय, पान की दुकानों पर अब सिर्फ पंचायत चुनाव की ही चर्चा है। प्रत्याशियों के समर्थक समीकरण बनाने में जुट गए हैं। आरक्षण में सीटों को अपने मन माफिक कराने की गुणा गणित भी शुरू हो गई है।
पंचायत चुनाव को लेकर गांवों का माहौल दिलचस्प
आरक्षण को लेकर असमंजस की स्थिति के बाद भी संभावित दावेदार कहीं राशन कार्ड बनवाने में दिलचस्पी लेते दिख रहे हैं तो कहीं लोगों के दवा इलाज से लेकर अन्य समस्याओं के समाधान की कोशिश में जुटा है। पेंशन, आवास की चिंता भी इन्हें होने लगी है। जो सबसे खास बात दिख रही है वर्तमान प्रधान को नकारा साबित करने की कोशिश की जा रही है। सरकार द्वारा विकास कार्यो के कराए जा रहे सोशल आडिट को विरोधी खुलकर हथियार बना रहे है। हर काम में कमी निकालने की कोशिश हो रही है। यहीं नहीं जन सूचना अधिकार के तहत प्रधानों के काम का हिसाब किताब भी किया जा रहा है। सब मिलाकर स्थिति दिलचस्प हो गई है। अब किसका दाव कितना सटीक बैठता है यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन गांवों का माहौल दिलचस्प हो गया है।